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“रथ पर नेता, सड़क पर हनुमान…” बांकीपुर के बीचो-बीच प्रशांत किशोर का तीखा वार

बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी प्रत्याशी के रोड शो का एक वीडियो शेयर कर बड़ा आरोप लगाया है। जानिए हनुमान जी के अपमान वाले इस नए विवाद ने कैसे बदला बांकीपुर का सियासी समीकरण।

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बिहार की सियासत में जब भी कोई बड़ा चुनाव आता है, तो उसमें आस्था, राजनीति और तीखे बयानों का तड़का लगना तय माना जाता है। इस समय पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव पूरे देश की नजरों में आ चुका है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद इस सीट से मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। गुरुवार को बांकीपुर की सड़कों पर पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर एक ऐसा गंभीर आरोप लगा दिया, जिसने पटना से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पीके ने बीजेपी प्रत्याशी के एक रोड शो का हवाला देते हुए सीधे सनातन और आस्था से जुड़ा मुद्दा उछाल दिया है, जिसके बाद बांकीपुर की जनता के बीच यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

चुनावी रैली में ‘हनुमान जी’ के रूप पर भड़के पीके, पूछा- क्या ये अहंकार नहीं है?

दरअसल, यह पूरा विवाद बीजेपी उम्मीदवार के एक रोड शो के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि बीजेपी प्रत्याशी की गाड़ी के आगे एक व्यक्ति भगवान हनुमान का रूप धारण किए हुए था और हाथ में बीजेपी का झंडा लेकर नाच रहा था। प्रशांत किशोर ने इसी दृश्य को आधार बनाकर बीजेपी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा, “अपने निजी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए हनुमान जी का अपमान करने वाली बीजेपी को बांकीपुर की जनता कभी माफ नहीं करेगी और चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।” पीके ने आगे कहा कि बीजेपी नेताओं में इस कदर अहंकार आ गया है कि वे खुद तो रथ जैसी गाड़ियों पर ठाट से बैठे हैं और भगवान के स्वरूप को सड़क पर झंडा थमाकर नचवा रहे हैं। उन्होंने जनता से सीधा सवाल किया कि क्या इस तरह के अभिमान को तोड़ा जाना चाहिए या नहीं?

बीजेपी का अभेद्य किला ढहाने के लिए प्रशांत किशोर ने झोंकी पूरी ताकत

बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर पिछले पांच बार से नितिन नवीन लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने भी लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। नितिन नवीन के राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर बीजेपी ने इस बार अभिषेक कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है, जिन्होंने हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ, महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी भी पूरी मजबूती से मैदान में डटी हैं। लेकिन इस बार असली चुनौती प्रशांत किशोर दे रहे हैं, जो आगामी 13 जुलाई को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पीके सुबह से लेकर रात तक बांकीपुर की गलियों और मोहल्लों में खाक छान रहे हैं और जनता के स्थानीय मुद्दों को उठाकर सीधे वोटरों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा पेंच, अब जनता के फैसले पर टिकी सबकी नजरें

प्रशांत किशोर द्वारा उठाए गए ‘हनुमान जी के अपमान’ वाले इस मुद्दे ने बीजेपी को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है, क्योंकि बीजेपी हमेशा खुद को सनातन धर्म और संस्कृति का रक्षक बताती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीके का यह दांव बांकीपुर के शहरी और धार्मिक मतदाताओं के रुख को प्रभावित कर सकता है। आरजेडी जहां अपने पारंपरिक वोट बैंक के सहारे जीत का दावा कर रही है, वहीं प्रशांत किशोर विकास, शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था परिवर्तन के साथ-साथ अब इस भावनात्मक मुद्दे को भी हवा दे रहे हैं। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी अपने इस अभेद्य किले को बचाने में कामयाब रहती है, या फिर प्रशांत किशोर का यह ‘हनुमान कार्ड’ बांकीपुर के सियासी इतिहास में एक नया अध्याय लिख देता है। जनता का मूड क्या है, इसका फैसला तो आने वाले चुनाव के नतीजों के साथ ही साफ हो पाएगा।

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