E20 Janata Party: देश में हाल के महीनों में कई जन अभियानों ने सोशल मीडिया के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी है। अब इसी कड़ी में E20 जनता पार्टी नाम का एक नया अभियान सामने आया है। यह किसी राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की पसंद और अधिकार से जुड़ा एक नागरिक अभियान बताया जा रहा है। इस अभियान का कहना है कि सरकार E20 पेट्रोल उपलब्ध कराए, लेकिन इसके साथ ही आम लोगों को 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिले। अभियान से जुड़े लोगों का तर्क है कि जब दूसरे उत्पादों में ग्राहकों को कई विकल्प मिलते हैं, तो ईंधन खरीदने में भी उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव करने का अधिकार होना चाहिए। यही मांग अब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन रही है।
वाहन मालिकों ने रखीं अपनी चिंताएं और सुझाव
इस अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि कई वाहन मालिक लंबे समय से माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और रखरखाव के खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि इन सभी मुद्दों पर साफ और पारदर्शी जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। अभियान की मांग है कि सभी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन के प्रकार की स्पष्ट जानकारी दी जाए और अलग-अलग ईंधन के प्रभाव से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को E20 पेट्रोल इस्तेमाल करना है तो वह करे, लेकिन जो लोग शुद्ध पेट्रोल लेना चाहते हैं, उन्हें भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उनका उद्देश्य किसी ईंधन का विरोध करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है।
सरकार का फोकस इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने पर
दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि वर्तमान में लागू E20 नीति वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में किसी भी बड़े बदलाव से पहले तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। ऐसे में सरकार और E20 Janata Party की मांग के बीच अब एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
क्या यह ऑनलाइन अभियान नीति पर असर डालेगा?
फिलहाल E20 Janata Party का अभियान मुख्य रूप से सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन कम समय में इसे बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलने लगा है। यही वजह है कि यह अभियान अब ऑटो सेक्टर और ईंधन नीति से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि 100 प्रतिशत पेट्रोल का विकल्प देने की मांग ने उपभोक्ता अधिकार, ईंधन नीति और वाहन मालिकों की पसंद को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। यदि यह अभियान और मजबूत होता है, तो भविष्य में इस मुद्दे पर नीति स्तर पर भी चर्चा तेज हो सकती है।
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