संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करता रहा। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। इस बैठक को मौजूदा राजनीतिक हालात के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से बैठक के एजेंडे की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन संसद के अंदर और बाहर चल रही राजनीतिक गतिविधियों के कारण इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी रहीं। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बावजूद सरकार ने अपना विधायी काम जारी रखा और लोकसभा में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को भी पारित करा लिया।
हंगामे के बीच पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक
लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनि मत से मंजूरी मिल गई। नए संशोधन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर दर्ज करानी होगी, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-जिलाधिकारी (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना और फर्जी रिकॉर्ड की संभावनाओं को कम करना है। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्ष के प्रदर्शन पर सरकार का पलटवार
संसद में लगातार हो रहे हंगामे पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि सभी सांसद इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करें और इसके लिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में पर्याप्त समय भी तय किया गया था। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय हंगामा करना चुना। दूसरी ओर राज्यसभा में भी विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। विपक्ष का कहना था कि सरकार महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया।
सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी सरकार की नजर
संसदीय गतिविधियों के साथ-साथ केंद्र सरकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी लगातार बैठकें कर रही है। एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी हुई थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि विदेशों में भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। संसद के भीतर जारी राजनीतिक टकराव के बावजूद सरकार प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर लगातार फैसले ले रही है। आने वाले दिनों में संसद का मानसून सत्र और अधिक राजनीतिक रूप से अहम रहने की संभावना जताई जा रही है।
