मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के रिछा गांव में रविवार को ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। गांव के लोग अपने “लाडले बंदर” की मौत से इतने दुखी हुए कि उन्होंने उसकी अंतिम यात्रा बैंड-बाजे और पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ निकाली। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के लोगों ने बताया कि यह बंदर कई सालों से गांव में ही रह रहा था और सभी के साथ उसका गहरा लगाव था।
बैंड-बाजे के साथ निकली शव यात्रा
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी बंदर की शव यात्रा में शामिल हुए। किसी ने फूलों से उसकी अर्थी सजाई, तो किसी ने डमरू और ढोल बजाकर उसे विदा किया। गांव के लोगों ने बताया कि बंदर के मरने की खबर जैसे ही फैली, पूरा गांव मातम में डूब गया। किसी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी, सिर्फ आंसू थे और अंतिम संस्कार की तैयारी।
इंसान और जानवर के रिश्ते की मिसाल
रिछा गांव का यह मामला मानवता की एक अनोखी मिसाल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर बच्चों के साथ खेलता था, लोगों के घरों में आता-जाता था और कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता था। वह पूरे गांव का सदस्य बन चुका था। उसकी मौत ने हर किसी को गहरा सदमा दिया। ग्रामीणों ने कहा कि जैसे हम अपने किसी परिजन को विदा करते हैं, वैसे ही हमने अपने इस साथी को भी पूरे सम्मान के साथ विदा किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह अनोखी घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बैंड-बाजे की धुन पर ग्रामीण बंदर की अर्थी को कंधे पर उठाए हुए हैं। कुछ महिलाएं आंखों में आंसू लेकर ‘राम नाम सत्य है’ के जाप कर रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को देखकर भावुक हो रहे हैं और कमेंट में लिख रहे हैं — “यह है सच्ची इंसानियत।” कई लोग इसे “मानवता की सबसे सुंदर मिसाल” बता रहे हैं।
प्रशासन और वन विभाग भी हुआ हैरान
घटना की जानकारी जब प्रशासन और वन विभाग तक पहुंची, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। आमतौर पर जानवरों के मरने पर ऐसी रस्में नहीं निभाई जातीं, लेकिन ग्रामीणों की भावना देखकर अधिकारियों ने भी इस कार्य को रोकने की कोशिश नहीं की। कई स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में पहली बार किसी जानवर की अंतिम यात्रा इतनी श्रद्धा और सम्मान के साथ निकली है।
गांव की पहचान बन गया ‘लाडला बंदर’
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, बंदर पिछले पांच सालों से गांव में रह रहा था। वह सुबह मंदिर के पास बैठता और बच्चों से फल या बिस्किट लेता था। गांव के हर घर में उसे पहचानते थे। उसकी मौत से ऐसा लगा जैसे किसी अपने का निधन हो गया हो। अब ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि जिस स्थान पर उसका अंतिम संस्कार हुआ, वहां एक छोटा सा स्मारक बनाया जाएगा ताकि उसकी यादें हमेशा जीवित रहें।
इंसानियत का संदेश देती यह घटना
रिछा गांव की यह घटना सिर्फ एक जानवर की अंतिम यात्रा नहीं, बल्कि इंसानियत और करुणा का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब लोग सोशल मीडिया पर नफरत और हिंसा के बीच उलझे हैं, तब एक छोटे से गांव ने यह दिखा दिया कि प्रेम और संवेदना की भाषा सबसे बड़ी होती है — चाहे वह किसी मनुष्य के लिए हो या किसी जानवर के लिए।
