उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक देखने को मिली है। प्रशासन द्वारा इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कांवड़ यात्रा और पैदल या वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया था। इसके बावजूद, दिल्ली के द्वारका इलाके से हरिद्वार होते हुए उत्तराखंड के तुंगनाथ धाम जा रहे श्रद्धालुओं का जत्था इसी रास्ते पर दाखिल हो गया। श्रद्धालुओं की स्कॉर्पियो गाड़ी में एक बड़ी और भव्य शिव प्रतिमा के साथ पवित्र कांवड़ रखी हुई थी। सवाल यह उठता है कि जब यह मार्ग पूरी तरह बंद था, तो दिल्ली से लेकर बागपत तक पुलिस और टोल नाकों पर तैनात कर्मचारियों ने इन्हें रोका क्यों नहीं और वे इस प्रतिबंधित रास्ते तक कैसे पहुंच गए?
सुबह-सुबह झपकी या लापरवाही, पीछे से मारी जोरदार टक्कर
रविवार सुबह करीब पांच बजे जब यह कांवड़ जत्था बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के हिलवाड़ी गांव के पास पहुंचा, तब एक भयानक हादसा हो गया। पीछे से आ रही एक अनियंत्रित और बेहद तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर कार ने कांवड़ ले जा रही स्कॉर्पियो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि फॉर्च्यूनर गाड़ी करीब 50 मीटर दूर जाकर रुकी। गनीमत यह रही कि कार के एयरबैग समय पर खुल गए, जिससे उसमें बैठे लोगों की जान तो बच गई, लेकिन कांवड़ियों की गाड़ी और उनकी पवित्र कांवड़ बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक सड़क दुर्घटना में कुल 7 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें मोनू और योगेश की हालत को देखते हुए विशेष चिंता जताई जा रही है।
चालक गाड़ी लॉक करके मौके से हुआ फरार
हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौका पाकर फॉर्च्यूनर का चालक अपनी गाड़ी को अंदर से पूरी तरह लॉक करके वहां से फरार हो गया। घटना की भनक लगते ही बड़ौत कोतवाली पुलिस तुरंत हरकत में आई और दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने क्रेन की सहायता से दुर्घटनाग्रस्त फॉर्च्यूनर को कॉरिडोर के ऊपर से नीचे उतरवाया और रास्ते को सुचारू किया। सभी 7 घायलों—दिनेश, विकास, आकाश, अमित, दोनों मोनू और योगेश को तत्काल प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के शाहदरा स्थित जीटीबी (GTB) अस्पताल में रेफर कर दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए तीखे सवाल
इस पूरी घटना ने बागपत पुलिस और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है, जिससे जनता के बीच कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन की तरफ से साफ निर्देश थे कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर पर कांवड़ियों का प्रवेश वर्जित है, तो फिर भारी चेकिंग के बावजूद यह जत्था वहां तक कैसे पहुंच गया? दूसरा सवाल यह है कि प्रतिबंधित और हाई-स्पीड वाले इस मार्ग पर इतनी रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर कोई लगाम क्यों नहीं है? फिलहाल, स्थानीय पुलिस फरार फॉर्च्यूनर चालक की पहचान करने और उसकी तलाश में जुटी हुई है। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि इस बड़ी सुरक्षा चूक और नियमों के उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों और आरोपी चालक के खिलाफ प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है।
