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क्या झारखंड में भी होने वाला है शिक्षा मंत्री का इस्तीफा? सोनम वांगचुक की एंट्री से गरमाई राज्य की सियासत!

झारखंड में परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्रों के प्रदर्शन और अनशन पर सोनम वांगचुक के जुड़ने की पूरी खबर पढ़ें। जानिए कैसे वीडियो कॉल पर टूटा अनशन और क्यों उठ रही इस्तीफे की मांग।

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राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो का आंदोलन इन दिनों राज्य की सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए आंदोलित छात्रों से सीधी बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। सोनम वांगचुक के विशेष आग्रह पर ही छात्र नेता देवेंद्र महतो ने पानी ग्रहण कर अपना अन्न त्याग वाला अनशन आगे बढ़ाया। इस वर्चुअल मुलाकात ने छात्रों के इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला दी है।

शिक्षा मंत्री को लेकर सोनम वांगचुक का बड़ा बयान

छात्रों के साथ चर्चा के दौरान सोनम वांगचुक ने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया और बड़ा बयान देते हुए कहा कि झारखंड राज्य को एक अलग शिक्षा मंत्री की आवश्यकता है। उन्होंने अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो को स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह देते हुए पानी, नमक और शहद का सेवन करने की बात कही, ताकि लंबे समय तक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सके। वांगचुक के इस संदेश के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है और हर कोई इस वर्चुअल संवाद की चर्चा कर रहा है।

मुख्यमंत्री और सीबीआई जांच को लेकर तीखे तेवर

वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी बात रखते हुए छात्र नेता देवेंद्र महतो ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें सीआईडी जांच पर कोई भरोसा नहीं है क्योंकि पहले भी ऐसी जांचों के नतीजे जनता देख चुकी है। छात्र नेता ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार का दिल साफ है और वह निष्पक्षता चाहती है, तो इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए। साथ ही, युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का हवाला देते हुए उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।

पिछले 26 सालों के संघर्ष और परीक्षाओं का दर्द

अनशन कर रहे छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि झारखंड गठन के बाद से पिछले 26 वर्षों से लगातार पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधेरे में डूब रहा है। उन्होंने टीजीटी 2016 परीक्षा पास करने और हाईकोर्ट के आदेश पर आयु सीमा में छूट के साथ जेपीएससी परीक्षा देने का अपना संघर्ष भी साझा किया। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह विरोध प्रदर्शन और अनशन इसी तरह शांतिपूर्ण लेकिन कड़े तेवरों के साथ आगे जारी रहेगा।

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