अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित गबन और चढ़ावा मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने दावा किया है कि इस मामले में आरोपी बताए जा रहे रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे कई नई बातें सामने आएंगी। हालांकि, बीजेपी ने अपने इस दावे के समर्थन में अभी कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप
अजय आलोक ने कहा कि इस मामले में अभी कई और खुलासे हो सकते हैं। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद लोगों को सच्चाई पता चलेगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी संत समाज ने उसके खिलाफ नाराजगी जताई थी। दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और मंदिर से जुड़े मामलों पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में यह मामला अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
दिग्विजय सिंह के बयान पर भी हुआ विवाद
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अगर अदालत को राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी मिलती है, तो वह अपना दान वापस मांगेंगे और किसी दूसरे धार्मिक संस्थान को दे देंगे। इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अजय आलोक ने कहा कि अगर दिग्विजय सिंह ने दान दिया है तो पहले उसकी रसीद दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर ट्रस्ट उनका पैसा ब्याज सहित लौटाने को तैयार है। वहीं, दिग्विजय सिंह ने खुद को सनातन परंपरा का पालन करने वाला बताते हुए कहा कि उन पर लगाए जा रहे धर्म विरोधी आरोप सही नहीं हैं।
वीएचपी ने जांच की मांग की
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी इस मामले में जांच की मांग की है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी वाड्रा, रामगोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत कई नेताओं के बयानों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिन नेताओं ने राम मंदिर के चंदे और गबन को लेकर आरोप लगाए हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनके पास इन आरोपों का क्या आधार और क्या सबूत हैं। वीएचपी का कहना है कि अगर कोई सबूत है तो उसे जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
