Balaghat Tiger Attack: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। खैरलांजी वन क्षेत्र में मवेशी चराने गए 50 वर्षीय किसान देवकराम वाघमारे की मौत हो गई। सोमवार सुबह उनका शव जंगल में खून से लथपथ हालत में मिला। घटनास्थल के पास एक गाय और उसके बछड़े के शव भी मिले हैं। वन विभाग और पुलिस की शुरुआती जांच में बाघ के हमले की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल है और वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
देर शाम तक घर नहीं लौटे तो शुरू हुई तलाश
जानकारी के मुताबिक देवकराम वाघमारे खेती-किसानी का काम करते थे। रविवार 9 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे वह अपनी गाय और उसके बछड़े को चराने के लिए गांव से लगे जंगल की ओर गए थे। आमतौर पर मवेशियों के साथ वापस लौटने वाले देवकराम जब देर शाम तक घर नहीं पहुंचे तो परिवार को चिंता हुई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आसपास के इलाके में उनकी तलाश शुरू की, लेकिन रात तक उनका कोई पता नहीं चल सका। सोमवार सुबह ग्रामीण एक बार फिर जंगल की ओर पहुंचे। करीब सात बजे मोक्षधाम घाट के पास घने जंगल में उन्हें पहले गाय और उसके बछड़े के शव दिखाई दिए। कुछ दूरी पर देवकराम का शव भी पड़ा मिला। उनके शरीर पर चोटों के निशान थे।
मौके पर मिले पंजों के निशान, बाघ के हमले का शक
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। कटंगी के एसडीओ यशपाल मेहरा, खैरलांजी वन परिक्षेत्र अधिकारी डीसी वासनिक और तिरोड़ी थाना पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया। अधिकारियों ने पंचनामा कार्रवाई के बाद किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए कटंगी स्वास्थ्य केंद्र भेजा। घटनास्थल के आसपास बाघ के पंजों के निशान और हमले से जुड़े कुछ संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, किसान की मौत किस तरह हुई, इसकी अंतिम पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकेगी। वन विभाग फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रहा है।
क्या मवेशियों को बचाने के दौरान किसान पर हुआ हमला?
ग्रामीणों के मुताबिक आशंका है कि बाघ ने पहले गाय और उसके बछड़े को अपना शिकार बनाया होगा। संभव है कि मवेशियों को बचाने या उनके पास जाने की कोशिश में देवकराम पर भी बाघ ने हमला कर दिया हो। हालांकि यह सिर्फ ग्रामीणों का अनुमान है और वन विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मिरगपुर के सरपंच दीपक देशमुख के मुताबिक देवकराम के घर नहीं लौटने पर ग्रामीणों ने रात में तलाश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। सुबह जंगल में शव मिलने के बाद तुरंत वन विभाग और पुलिस को सूचना दी गई। घटना के बाद इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
परिवार को आर्थिक मदद, जंगल में बढ़ाई गई निगरानी
किसान की मौत के बाद वन विभाग ने परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी है। विभाग की ओर से बताया गया है कि नियमानुसार 24 घंटे के भीतर आठ लाख रुपये और शासन स्तर से स्वीकृत 17 लाख रुपये की सहायता एक महीने के भीतर दिए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। ग्रामीणों को अकेले जंगल की तरफ नहीं जाने और मवेशियों को चराने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वन अमला बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ मृतक परिवार को जल्द पूरा मुआवजा देने की मांग की है।
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