Dharmendra Pradhan News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पिछले कुछ दिनों से देश में चल रहे घटनाक्रम को लेकर वे काफी आहत थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या दबाव के कारण नहीं, बल्कि देशहित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है। अपने विदाई संदेश में उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतें मौजूदा परिस्थितियों का फायदा उठाकर माहौल खराब न कर सकें, इसलिए उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है। प्रधान पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र राजनीति, शिक्षण और शिक्षा सुधारों से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण इस घटनाक्रम से उनका व्यथित होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
नीट-यूजी परीक्षा और सरकार की कार्रवाई
अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विवादों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि परीक्षा में आई अनियमितताओं को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया था। मामले की तुरंत सीबीआई जांच के आदेश दिए गए, विवादित परीक्षा को रद्द कर नई तारीख की घोषणा की गई और भविष्य के लिए परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित (सीबीटी) मोड में शिफ्ट करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। सरकार की मुख्य प्राथमिकता देश के 20 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना था, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने आपसी तालमेल के साथ मिलकर काम किया और आखिरकार 21 जून को परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
ज़िम्मेदारी स्वीकारना और छात्रों का हित
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपनी बात रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ली और कभी भी विकट परिस्थितियों से मुंह नहीं मोड़ा। उनका एकमात्र संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफियाओं की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। 16 जुलाई को जब नीट-यूजी के नए परिणाम घोषित हुए, तो वे संतोषजनक रहे और देश के दूर-दराज के गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले कई प्रतिभावान छात्रों को सफलता मिली। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि परिणामों के बाद भी कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग लगातार छात्रों को गुमराह करने और व्यवस्था में बाधा डालने की साजिश रच रहे थे।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
प्रधानमंत्री का जताया आभार
अपने कार्यकाल का समापन करते हुए धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में देश की सेवा करने का जो अवसर उन्हें मिला, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। भारत के युवाओं की उम्मीदों और उनकी न्यायोचित आकांक्षाओं का सम्मान करना उनके राजनीतिक जीवन का मूल मंत्र रहा है। देश की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना ही उनका मुख्य नैतिक संकल्प है। अब उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद देश की राजनीतिक और शैक्षणिक व्यवस्था में एक नई बहस छिड़ गई है कि आगे सरकार इस मोर्चे पर क्या नया कदम उठाएगी।
