राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इन दिनों देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल का गवाह बन चुका है। NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से पूरे देश में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे, ने इस सफलता को छात्रों की एक ऐतिहासिक जीत करार दिया है। उनके समर्थकों में इस समय जश्न का माहौल है और हर तरफ इसी बात की चर्चा है कि कैसे एक मजबूत राजनीतिक सत्ता को जमीन पर झुका दिया गया।
अभिजीत दीपके का तीखा बयान: “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए”
इस्तीफे की पुष्टि होने के बाद CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर से अपना पहला तीखा और जोरदार रिएक्शन दिया। उन्होंने जोश के साथ कहा कि जब वह अमेरिका से इस आंदोलन के लिए निकले थे, तब कई लोग यह सवाल उठा रहे थे कि आखिर इससे क्या हासिल होगा और क्या सरकार कभी झुकेगी। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि यह कहा जाता था कि इस मौजूदा सरकार में कभी इस्तीफे नहीं होते और आंदोलन विफल हो जाएंगे। लेकिन 36 दिनों तक लगातार चले संघर्ष और हर रोज उठने वाले सवालों को मात देते हुए आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ना ही पड़ा।
प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी और इस्तीफे की असली वजह
सूत्रों और सामने आए आधिकारिक पत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। अपने इस पत्र में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि देश-विरोधी तत्व जंतर-मंतर और पूरे देश में चल रहे इस माहौल का गलत फायदा न उठा सकें। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के छात्र किसी भी तरह की कानूनी उलझनों में न फंसें और उनका पूरा ध्यान केवल अपनी पढ़ाई तथा उज्ज्वल भविष्य पर केंद्रित रहे, इसी बड़ी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है ताकि देश में शांति और एकजुटता बनी रहे।
जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद अभिजीत दीपके और उनके हजारों समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह जीत केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की एक बड़ी मिसाल है। इस सनसनीखेज इस्तीफे के बाद अब देश की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है, और विपक्षी दलों के साथ-साथ छात्र संगठनों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार अगला कौन सा बड़ा कदम उठाती है।
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