लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल को लेकर मंगलवार को जोरदार बहस शुरू हुई। यह विधेयक देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। चर्चा की शुरुआत के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी अलग-अलग राज्यों और कई बड़ी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होते रहे, लेकिन उस समय ऐसी सख्त कानूनी व्यवस्था नहीं थी, जैसी अब बनाई जा रही है। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस भी देखने को मिली।
कांग्रेस शासन के पुराने मामलों का किया जिक्र
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कांग्रेस सरकार के समय सामने आए कई पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में रेलवे भर्ती परीक्षा और 2012 में एम्स प्रवेश परीक्षा सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं। उनका कहना था कि उस समय इन मामलों पर जिस स्तर की कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि देश में परीक्षा सुधार को लेकर पहले भी कई समितियां बनाई गई थीं। वर्ष 1992 और 2010 में भी केंद्रीय परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के सुझाव दिए गए थे, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। उनके अनुसार, वर्ष 2024 में पहली बार इस दिशा में व्यापक कानून लाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, ईमानदारी और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
चर्चा का समय बढ़ा, विपक्ष ने उठाए प्रक्रिया से जुड़े सवाल
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए शुरुआत में छह घंटे का समय तय किया गया था, लेकिन विपक्ष ने अधिक समय की मांग की। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर 10 घंटे तक चर्चा के लिए भी तैयार है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की सहमति से चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया। कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने सरकार से कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री की अनुपस्थिति का भी सवाल उठाया। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि संबंधित मंत्री सदन में मौजूद हैं और चर्चा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर रहेगा सबका ध्यान
एंटी पेपर लीक बिल को देश की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी और लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है। संसद में इस विधेयक पर जारी चर्चा के दौरान विभिन्न दल अपने सुझाव और संशोधन भी रख रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बहस के बाद इस विधेयक का अंतिम स्वरूप क्या होगा और यह देश की परीक्षा व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव ला पाएगा।
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