देशभर में छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि फिलहाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है और जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। कोर्ट का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और कानून व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से अदालत ने जांच एजेंसियों को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और विभिन्न राज्यों की नजर अब आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।
आठ राज्यों को नोटिस, जांच के लिए बन सकती है हाई लेवल कमेटी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, असम और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने संकेत दिए कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश को सौंपी जा सकती है। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पारदर्शी तरीके से हो और सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।
सबूत सुरक्षित रखने और छात्रों की निजता बचाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों की पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखे जाएं। इसमें सीसीटीवी फुटेज, कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश पक्ष ने भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों के शामिल होने की आशंका की जांच की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पहलुओं की जांच कानून के दायरे में रहकर ही की जाएगी।
नाबालिगों की रिहाई पर भी कोर्ट ने दिखाई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से उन आरोपों पर चिंता जताई, जिनमें कुछ राज्यों में नाबालिग प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने की बात सामने आई थी। अदालत ने कहा कि यदि किसी नाबालिग को हिरासत में रखा गया है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। इसके साथ ही जिन प्रदर्शनकारियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है, उन्हें भी जल्द रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी राज्यों की पुलिस अपने यहां दर्ज एफआईआर की जांच जारी रख सकती है। फिलहाल किसी भी नई गिरफ्तारी या अन्य कठोर कार्रवाई पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन बनाने वाला महत्वपूर्ण अंतरिम फैसला माना जा रहा है। अब सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां इस पूरे मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
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