देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा विवाद और छात्रों के भविष्य को लेकर चल रही बहस के बीच एक नए राजनीतिक-सामाजिक समूह ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि वह 6 जून को भारत लौटकर नई दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य उन छात्रों की आवाज को सामने लाना है, जो विभिन्न परीक्षा विवादों और शैक्षणिक समस्याओं को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के जरिए लगातार छात्रों के मुद्दे उठाए जा रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि लोकतांत्रिक तरीके से जमीन पर भी अपनी बात रखी जाए। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के गठन के बाद संस्थापक का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम माना जा रहा है, जिस पर कई छात्रों और सोशल मीडिया यूजर्स की नजर बनी हुई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति लेने की योजना
अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों और फॉलोअर्स को संबोधित करते हुए प्रदर्शन की पूरी रूपरेखा भी साझा की है। उन्होंने कहा कि भारत पहुंचने के बाद सबसे पहले वह अपने समर्थकों के साथ संबंधित अधिकारियों से मिलकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन या विरोध को संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या टकराव से बचें और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखें। दिपके के अनुसार, यह प्रदर्शन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को लेकर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए छात्र समुदाय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान पर जताया भरोसा
अपने संदेश में अभिजीत दिपके ने भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी लोकतांत्रिक समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को अपनी चिंताओं और मांगों को कानून के दायरे में रहकर रखने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके कुछ मित्र और परिवार के सदस्य इस आंदोलन को लेकर चिंतित हैं, लेकिन उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए। दिपके ने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगत सिंह और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं ने हमेशा जनता को अपनी बात रखने का अवसर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी मुद्दे का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।
छात्रों के भविष्य को लेकर एकजुट होने की अपील
अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों, छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और छात्रों के हितों से जुड़े मामलों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उनके अनुसार, लाखों छात्रों का भविष्य ऐसे निर्णयों से प्रभावित होता है, इसलिए संबंधित संस्थाओं और नीति निर्माताओं को भी पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। दिपके ने कहा कि अगर नागरिक अपनी चिंताओं को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखेंगे, तो उनकी आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सुनी जाएगी। 6 जून को प्रस्तावित यह प्रदर्शन अब चर्चा का विषय बन चुका है और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसमें कितने लोग शामिल होते हैं तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आगे किस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है।
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