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सरकार और CJP के बीच हुई क्यों सीक्रेट बैठक? प्रवक्ता सौरव दास ने किया बड़ा खुलासा

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आगे कार्रवाई नहीं करने को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों से अहम बातचीत हुई है। जानिए पूरा मामला और अब आगे क्या हो सकता है।

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CJP Protest News: जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद अब एक नया राजनीतिक मोड़ सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की। यह बैठक करीब दो से तीन घंटे तक चली, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और आगे की कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि, सरकार की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

FIR वापस लेने और आगे कार्रवाई नहीं करने का किया दावा

सौरव दास के अनुसार, बैठक के दौरान सरकार के प्रतिनिधियों ने बिहार और असम से जुड़े कुछ दस्तावेज साझा किए। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, भविष्य में उनके खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं करने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आश्वासन दिया गया है। सौरव दास ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार और अन्य भाजपा तथा एनडीए शासित राज्यों से भी इसी तरह की अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और संगठन सभी प्रभावित लोगों के साथ खड़ा रहेगा।

कई राज्यों में दर्ज हुए मामले, कानूनी सहायता की तैयारी

दिल्ली के अलावा बिहार, असम और राजस्थान सहित कई राज्यों में आंदोलन के दौरान प्रदर्शन हुए थे। इन घटनाओं के बाद विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए। CJP का कहना है कि इन सभी मामलों को वापस लेने की दिशा में बातचीत चल रही है। इसी बीच वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आंदोलन से जुड़े गिरफ्तार और मुकदमों का सामना कर रहे छात्रों को कानूनी सहायता देने के लिए एक करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराने की घोषणा की है। सौरव दास ने कहा कि संगठन कानूनी लड़ाई को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ वकीलों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि जरूरतमंद छात्रों को उचित कानूनी मदद मिल सके।

सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

CJP के दावों के बाद अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि वास्तव में विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह आंदोलन से जुड़े छात्रों और प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत मानी जाएगी। हालांकि, फिलहाल सरकार या संबंधित पुलिस एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इन दावों पर क्या फैसला होता है। जब तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं होते, तब तक मामले की स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर यह मुद्दा आने वाले समय में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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