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क्या फिर जंतर-मंतर लौटेगा आंदोलन? CJP ने सरकार को अचानक क्यों दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम?

CJP ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी का दावा है कि समझौते का पालन नहीं हो रहा और मांगें पूरी नहीं होने पर फिर से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। जानिए पूरा मामला।

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नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद सरकार के साथ समझौते के जरिए अपना धरना समाप्त करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी का आरोप है कि आंदोलन खत्म होने के दौरान जो भरोसा सरकार की ओर से दिया गया था, उसका पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को टैग करते हुए कहा कि समझौते के अनुसार आंदोलन से जुड़े छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर किसी तरह की पुलिस कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। उनका दावा है कि इसके बावजूद कुछ राज्यों में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने सरकार से जल्द जवाब देने की मांग की है।

CJP ने रखीं कई मांगें, फिर आंदोलन की दी चेतावनी

आशुतोष रांका ने अपने बयान में कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली समेत कुछ राज्यों में छात्रों को हिरासत में लेने, निगरानी रखने और उत्पीड़न किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने मांग की कि आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को तुरंत वापस लिया जाए और भविष्य में भी ऐसे किसी मामले में कार्रवाई न की जाए। CJP ने सरकार से कहा है कि वह जल्द स्पष्ट करे कि इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यदि तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला और छात्रों पर कार्रवाई जारी रही, तो वह दोबारा जंतर-मंतर पर धरना शुरू करने के लिए मजबूर होगी। इससे साफ है कि आंदोलन की वापसी की संभावना को लेकर सियासी हलचल फिर तेज हो गई है।

 आरोपों की अब तक नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि

हालांकि, CJP की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सार्वजनिक रूप से ऐसे ठोस दस्तावेज या उदाहरण भी सामने नहीं आए हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ व्यापक स्तर पर नए मामले दर्ज किए गए हैं। आशुतोष रांका ने भी अपने बयान में किसी विशेष एफआईआर, गिरफ्तारी या मामले का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया। ऐसे में फिलहाल यह मामला आरोप और जवाब के स्तर पर ही बना हुआ है। सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।

पहले हुआ था समझौता, अब नए विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

25 जुलाई को सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया था। उस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित कई मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही गई थी। बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे। CJP का दावा है कि उसी बैठक में यह आश्वासन दिया गया था कि आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और पहले से दर्ज मामलों पर भी उचित कदम उठाए जाएंगे। अब पार्टी का कहना है कि यदि इन आश्वासनों का पालन नहीं हुआ तो वह फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगी। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों के अगले कदम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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