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‘अगर धर्मेंद्र प्रधान नहीं हटे तो…’ क्या करने वाली है CJP? अब ‘प्लान बी’ पर टिकी सबकी नजर

CJP ने केंद्र सरकार से बातचीत के बाद कहा कि मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक सहमति बनी है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब भी कायम है। जानिए आशुतोष रांका ने 'प्लान बी' को लेकर क्या बड़ा संकेत दिया।

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केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद कई मुद्दों पर सकारात्मक माहौल देखने को मिला, लेकिन पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि मुआवजा और कानूनी मामलों को लेकर सरकार का रुख पहले से बेहतर दिखाई दिया है और इन विषयों पर सहमति बनने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पार्टी को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन फैसलों को लिखित रूप में भी साझा करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है और इस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP

आशुतोष रांका ने कहा कि यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई स्पष्ट फैसला नहीं लेती है तो केवल बाकी मुद्दों पर सहमति बनने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक, छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि जब तक मुख्य मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन का उद्देश्य अधूरा रहेगा। रांका ने यह भी कहा कि सरकार और संगठन के बीच बातचीत जारी रह सकती है, लेकिन यदि सबसे अहम मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आगे की रणनीति लागू की जाएगी।

 क्या है CJP का ‘प्लान बी’?

जब आशुतोष रांका से पूछा गया कि यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी का अगला कदम क्या होगा, तो उन्होंने संकेत दिया कि संगठन ने वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रखी है। हालांकि उन्होंने इस रणनीति का खुलासा नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी अपने अगले कार्यक्रम की घोषणा करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं और छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो आंदोलन को नए चरण में ले जाने का फैसला लिया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि CJP आगे किस तरह का कदम उठा सकती है।

अब सरकार के अगले फैसले पर टिकी नजर

फिलहाल सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर बनी हुई है। यदि सरकार मुआवजे और कानूनी मामलों पर लिखित सहमति देती है, तो यह बातचीत का सकारात्मक परिणाम माना जाएगा। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर क्या फैसला होता है, यही आने वाले समय में पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा। दूसरी ओर, CJP ने साफ कर दिया है कि वह अपने आंदोलन को केवल आश्वासनों के आधार पर समाप्त नहीं करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के बीच फिर से बातचीत हो सकती है या आंदोलन नए रूप में सामने आ सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस चुनौती का जवाब कैसे देती है और क्या दोनों पक्ष किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं।

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