दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद अब एक नई बहस शुरू हो गई है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कुछ लोगों की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सफदरजंग अस्पताल की केस शीट में कुछ घायल प्रदर्शनकारियों के शरीर में त्वचा के अंदर छर्रे जैसे कण फंसे होने का उल्लेख किया गया है। इसी के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ये चोटें कैसे लगीं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस लगातार यह कह रही है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। ऐसे में अस्पताल की रिपोर्ट और पुलिस के बयान के बीच अंतर को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है।
मेडिकल केस शीट में दर्ज हुई छर्रों जैसी चोटों की जानकारी
जानकारी के अनुसार, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती एक 28 वर्षीय घायल प्रदर्शनकारी की मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसकी चोटों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया। रिपोर्ट में लिखा गया कि शरीर के प्रभावित हिस्से में त्वचा के भीतर छोटे-छोटे छर्रे जैसे कण मौजूद थे। साथ ही घाव के आसपास सूजन, तेज दर्द और त्वचा के रंग में बदलाव का भी उल्लेख किया गया। मेडिकल दस्तावेज में “पेलेट के टुकड़े त्वचा में फंसे” और “पेलेट जैसी चोट” जैसे शब्द दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि अस्पताल की ओर से इस रिपोर्ट को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की गई है। इसी मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर प्रदर्शनकारी और उनके समर्थक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि रिपोर्ट में ऐसी चोटों का जिक्र है, तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
पुलिस ने दोहराया अपना पक्ष, आरोपों को बताया गलत
दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रदर्शनकारी पर पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल आवश्यक और निर्धारित उपाय किए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की गई है। हालांकि अब तक पुलिस ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों पर अलग से कोई विस्तृत जवाब जारी नहीं किया है। इसी वजह से यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, जांच की मांग तेज
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा यह विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। घायल प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदर्शन के दौरान किस प्रकार की कार्रवाई की गई थी। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी थी और सभी कदम कानून के दायरे में रहकर उठाए गए। फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस के बयान और प्रदर्शनकारियों के आरोपों के बीच अलग-अलग दावे सामने हैं। ऐसे में अब अदालत और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में जो भी आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएंगे, उनसे पूरे विवाद की तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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