भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब अंतरिक्ष तकनीक में किसी से पीछे नहीं है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट LVM-3 M6 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिशन के जरिए BlueBird-6 नाम का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसका वजन करीब 6100 किलोग्राम है। यह अब तक स्पेस में भेजा गया सबसे भारी सैटेलाइट माना जा रहा है। सैटेलाइट को लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस मिशन ने न केवल ISRO के तकनीकी कौशल को साबित किया, बल्कि भारत की अंतरिक्ष क्षमता को एक नई ऊंचाई भी दी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन।
LVM-3 क्यों कहलाता है भारत का ‘बाहुबली’
LVM-3 रॉकेट को भारत का ‘बाहुबली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह भारी से भारी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता रखता है। इस रॉकेट का इस्तेमाल गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी किया जाना है। BlueBird-6 जैसे विशाल सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना यह साबित करता है कि ISRO अब बड़े और जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मिशन में सटीक प्लानिंग, एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत लीडरशिप की जरूरत थी। ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने खुद इस मिशन की निगरानी की और लॉन्च के बाद बताया कि यह भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। उनकी अगुवाई में ISRO लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
कौन हैं ISRO चेयरमैन वी. नारायणन
वी. नारायणन ISRO के उन वैज्ञानिकों में से हैं जिन्होंने ज़मीन से उठकर अंतरिक्ष तक भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई भारत में ही पूरी की और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल की। विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि के कारण उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान को अपना करियर चुना। ISRO में शामिल होने के बाद उन्होंने क्रायोजेनिक इंजन, लॉन्च व्हीकल सिस्टम और रॉकेट टेक्नोलॉजी से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट्स पर काम किया। कठिन तकनीकी चुनौतियों को सरल समाधान में बदलने की उनकी क्षमता ने उन्हें ISRO के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया। आज वे न केवल एक वैज्ञानिक हैं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं।
ISRO के भविष्य की दिशा तय कर रहे नारायणन
BlueBird-6 मिशन की सफलता के साथ यह साफ हो गया है कि ISRO अब बड़े पैमाने पर कमर्शियल और रणनीतिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार है। वी. नारायणन के नेतृत्व में ISRO का फोकस सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान, डीप स्पेस मिशन और नई लॉन्च तकनीकों पर भी काम हो रहा है। उनका मानना है कि भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना समय की जरूरत है। यही वजह है कि ISRO लगातार स्वदेशी तकनीक को मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में भारत जिस तरह से अंतरिक्ष की नई ऊंचाइयों को छूने वाला है, उसमें वी. नारायणन की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
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