ओमान की खाड़ी में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। 11 जून को एक बड़ा खुलासा सामने आया जब 9 जून को अमेरिकी कार्रवाई में निशाना बने एमटी स्टेबेलो जहाज पर सवार तीन भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका से औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को तलब कर पूरे मामले पर जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों और समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हमलों से समुद्री रास्तों पर बढ़ी चिंता
पिछले चार दिनों में ओमान की खाड़ी में तीन अलग-अलग जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। इनमें भारतीय क्रू वाले जहाज भी शामिल हैं। 8 जून को एमटी मैरीवेक्स नामक जहाज पर हमला हुआ, जिस पर 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। हालांकि, इस घटना में सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद 9 जून को एमटी स्टेबेलो जहाज पर हमला हुआ, जिसमें बाद में तीन भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई। एक अन्य जहाज एमटी जलवीर पर भी हमले की सूचना मिली, जिसमें आग लगने और आपातकालीन संदेश (SOS) भेजे जाने की बात सामने आई। लगातार हो रहे इन हमलों ने समुद्री व्यापार और तेल परिवहन मार्गों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फंसे व्यापारी जहाज
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ता दिख रहा है। ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर भी दिखने लगा है। ईरान की ओर से इस क्षेत्र में निगरानी और नियंत्रण को लेकर पहले ही सख्त बयान दिए जा चुके हैं। वहीं अमेरिका की नौसेना की मौजूदगी भी इस इलाके में लगातार बनी हुई है। ऐसे में इन दोनों शक्तियों के बीच टकराव का असर सीधे समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकता है असर
भारतीय जहाजों पर हुए इन हमलों ने कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। भारत सरकार ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी संबंधित पक्षों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं इस मामले ने भारत और अमेरिका के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। व्यापार समझौते, तकनीकी सहयोग और अन्य मुद्दों पर चल रही बातचीत पहले से ही धीमी गति में थी, और अब इस घटना ने संबंधों में और दूरी पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है, जहां वैश्विक नेता इस बढ़ते संकट पर नजर बनाए हुए हैं।
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