दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक कविता साझा कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बलों द्वारा रोकने और इलाके में तनाव की खबरों के बीच उनका यह पोस्ट तेजी से चर्चा में आ गया। अखिलेश यादव ने अपनी कविता में लिखा कि जब अन्याय और सत्ता का अहंकार अपनी सीमा पार कर जाता है, तब बदलाव की शुरुआत होती है। उन्होंने सीधे किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को मौजूदा छात्र आंदोलन और केंद्र सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर उनकी इस पोस्ट पर समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कविता के जरिए सरकार पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब निराशा बढ़ती है, अन्याय चरम पर पहुंचता है और देश का भविष्य दांव पर लग जाता है, तब बदलाव की आवाज तेज होती है। उन्होंने सत्ता के घमंड और जनता की भावनाओं का जिक्र करते हुए कई पंक्तियां साझा कीं, जिन्हें राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। सपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र संगठनों और CJP की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। विपक्ष लगातार सरकार से संवाद शुरू करने की मांग कर रहा है।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव, पुलिस ने रोकी भीड़
सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े। प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस मार्च की अनुमति नहीं दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई इलाकों में विशेष इंतजाम किए गए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, सुरक्षा बलों ने उन्हें निर्धारित सीमा पर रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास किया। घटनास्थल से आंसू गैस के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों को हटाने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। संसद भवन के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई तथा कई मार्गों पर आवाजाही भी प्रभावित रही।
आंदोलन के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
छात्र आंदोलन अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विभिन्न विपक्षी दल लगातार आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीर चर्चा की अपील कर रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि बैठक को लेकर आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक ठोस फैसला नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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