मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। शराब की दुकान हटाने की मांग को लेकर चल रहा एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक ‘खूनी खेल’ में तब्दील होते-होते बचा। यहां विरोध जताने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के एक नेता ने जैसे ही अपने शरीर पर पेट्रोल उड़ेला, भीड़ के बीच छिपे किसी अज्ञात व्यक्ति ने जलती हुई माचिस की तीली फेंक दी। देखते ही देखते सड़क पर आग की लपटें उठने लगीं और वहां मौजूद महिलाओं और बच्चों में चीख-पुकार मच गई। यह पूरा मंजर कैमरे में कैद हो गया है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है।
शराब दुकान के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा
यह पूरा मामला सागर के छोटी बजरिया स्थित भीम वार्ड का है। यहाँ के रहवासी पिछले कई दिनों से इलाके में संचालित एक शराब दुकान को हटाने की जिद पर अड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दुकान की वजह से पूरे क्षेत्र का माहौल दूषित हो रहा है। आए दिन शराबी और असामाजिक तत्व वहां जमावड़ा लगाते हैं, जिससे स्कूल जाने वाली लड़कियों और घर से निकलने वाली महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को इसी आक्रोश ने उग्र रूप ले लिया जब बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष दुकान के बाहर धरने पर बैठ गए। इसी दौरान आम आदमी पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष निर्मल रैकवार भी प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने पहुँचे थे।
आत्मदाह की कोशिश
प्रदर्शन के दौरान अचानक माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब आप नेता निर्मल रैकवार ने अपनी मांग मनवाने के लिए ‘क्रांतिकारी’ रास्ता चुना और अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। नेताजी ने जैसे ही पेट्रोल की बोतल अपने सिर पर पलटी, पुलिस और प्रदर्शनकारी हक्के-बक्के रह गए। लेकिन स्थिति तब और भयावह हो गई जब भीड़ में मौजूद किसी असामाजिक तत्व ने जमीन पर गिरे पेट्रोल पर जलती हुई तीली फेंक दी। क्षण भर में आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। गनीमत रही कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए निर्मल रैकवार को फौरन अपने वाहन में खींच लिया और सुरक्षित स्थान पर ले गए। अगर पुलिस की फुर्ती में जरा भी देरी होती, तो पेट्रोल से सराबोर आप नेता जिंदा जल सकते थे और वहां मौजूद दर्जनों महिलाएं भी इसकी चपेट में आ सकती थीं।
ज्ञापन के साथ खत्म हुआ हंगामा
आगजनी की इस घटना के बाद वहां भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक निर्मला सप्रे ने भी दखल दिया। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द ही प्रशासन के माध्यम से निकाला जाएगा। विधायक ने लोगों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें और कानून को हाथ में न लें। इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार हेमराज मेहर को एक ज्ञापन सौंपा और फिलहाल के लिए अपना धरना समाप्त कर दिया। पुलिस अब उस अज्ञात व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने भीड़ के बीच आग लगाने की कोशिश की थी।
प्रशासन पर उठते सवाल
सागर की इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब वे लंबे समय से इस दुकान का विरोध कर रहे थे, तो प्रशासन ने उनकी मांग पर ध्यान क्यों नहीं दिया? क्या सिस्टम को जगाने के लिए किसी की जान जाना जरूरी है? भले ही इस बार एक बड़ी त्रासदी टल गई हो, लेकिन पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश और फिर भीड़ में से किसी का आग लगाना, यह दर्शाता है कि लोगों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के जरिए उस शरारती तत्व की पहचान करने में जुटी है जिसने इस प्रदर्शन को हिंसक बनाने की साजिश रची थी।
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