मालीपुर (उत्तर प्रदेश): जरा सोचिए, आप अपने घर में आराम से बैठे हों और अचानक आपकी नजर दीवार पर रेंगते हुए एक-एक कर दर्जनों जहरीले सांपों पर पड़े, तो आपकी क्या हालत होगी? उत्तर प्रदेश के मालीपुर थाना क्षेत्र के आजनपारा गांव में एक ऐसा ही वाकया सामने आया है, जिसने न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे इलाके के लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। यहां एक कच्चे मकान की दीवार और ड्रम के पीछे से 25 जहरीले कोबरा सांप के बच्चे और एक विशालकाय नागराज निकलने से हड़कंप मच गया। इस खौफनाक मंजर को जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। गनीमत रही कि समय रहते इस खतरे को भांप लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
मासूमों की नजर और मच गया कोहराम
यह पूरी घटना आजनपारा गांव के रहने वाले दिनेश विश्वकर्मा के घर की है। रोज की तरह घर में चहल-पहल थी और दिनेश के बच्चे मिट्टी की दीवार वाले एक कमरे के पास खेल रहे थे। इसी दौरान बच्चों की नजर दीवार की दरारों से रेंगते हुए छोटे-छोटे सांपों पर पड़ी। बच्चे पहले तो समझ नहीं पाए, लेकिन जब उन्होंने गौर से देखा कि वो कोई साधारण जीव नहीं बल्कि जहरीले कोबरा नाग के बच्चे हैं, तो उनके हलक से चीख निकल गई। बच्चों के शोर मचाने पर परिवार के अन्य सदस्य दौड़े-दौड़े मौके पर पहुंचे। जब कमरे के कोने में रखे पुराने ड्रम और वहां जमा कूड़े-करकट को हटाया गया, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों सांप के बच्चे इधर-उधर रेंग रहे थे। इसी बीच एक बहुत बड़ा कोबरा भी फुफकारता हुआ नजर आया, जो देखते ही देखते दीवार के एक गहरे बिल में समा गया।
तमाशबीनों का हुजूम और सपेरे की एंट्री
घर में दर्जनों सांप होने की खबर आग की तरह पूरे आजनपारा गांव और आसपास के इलाकों में फैल गई। कुछ ही मिनटों में दिनेश विश्वकर्मा के घर के बाहर सैकड़ों ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई अपनी आंखों से इस हैरान कर देने वाले नजारे को देखना चाहता था, लेकिन डर के मारे किसी की भी हिम्मत घर के अंदर कदम रखने की नहीं हो रही थी। खतरे की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत पास के जगतुपुर गांव के मशहूर सपेरे राजित राम कनौजिया से संपर्क किया। सूचना मिलते ही सपेरा अपनी टीम और सांप पकड़ने वाले उपकरणों (डिब्बों) के साथ मौके पर पहुंच गया। इसके बाद शुरू हुआ सांपों को सुरक्षित निकालने का वो रेस्क्यू ऑपरेशन, जिसे देखकर लोगों की सांसें थमी रहीं।
घंटों की मशक्कत और 25 कोबरा का रेस्क्यू
सपेरे राजित राम ने बेहद सावधानी के साथ कमरे की एक-एक जगह की तलाशी शुरू की। ड्रम के पीछे और मिट्टी की दीवारों की दरारों से एक-एक कर जहरीले कोबरा के बच्चे बाहर निकाले जाने लगे। सपेरा उन्हें पकड़ता और प्लास्टिक के सुरक्षित डिब्बों में बंद करता गया। करीब दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कुल 25 कोबरा के बच्चे पकड़े जा चुके थे, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी। वह विशालकाय कोबरा (नागराज) अभी भी खपरैल और दीवार के बीच छिपा हुआ था। सपेरे ने ग्रामीणों की मदद से खपरैल के एक हिस्से को हटवाया और बिल के अंदर हाथ डालकर उस बड़े नागराज को भी सफलतापूर्वक दबोच लिया। जब वह बड़ा कोबरा बाहर आया तो उसकी लंबाई और फुफकार देखकर वहां खड़े लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
जंगल में मिली नई जिंदगी, गांव ने ली राहत की सांस
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे अच्छी बात यह रही कि इतनी दहशत के बाद भी ग्रामीणों ने धैर्य नहीं खोया और किसी भी सांप को नुकसान नहीं पहुंचाया। सपेरे राजित राम ने पकड़े गए सभी 25 कोबरा के बच्चों और बड़े नागराज को सुरक्षित डिब्बों में बंद किया। इसके बाद वह उन्हें गांव से दूर एक घने और सुरक्षित नजदीकी जंगल में ले गया, जहां सभी सांपों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। सांपों के घर से पूरी तरह साफ होने और उनके जंगल में छोड़े जाने के बाद दिनेश के परिवार और पूरे गांव ने राहत की सांस ली। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं कि इतने सांपों के बीच रहने के बाद भी परिवार का हर सदस्य पूरी तरह सुरक्षित है।
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