Bangladesh President Resigns: बांग्लादेश की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक लिए गए इस फैसले ने देश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। इस्तीफे के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में शहाबुद्दीन ने कहा कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका इस्तीफा संसद तक भेज दिया गया है और अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राष्ट्रपति का पद भले ही बांग्लादेश में मुख्य रूप से औपचारिक माना जाता है, लेकिन ऐसे समय में उनका इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लंदन यात्रा और शेख हसीना से बातचीत की चर्चाओं के बीच आया फैसला
शहाबुद्दीन का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उन्होंने इस वर्ष मई में इलाज के लिए लंदन यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। शेख हसीना पिछले वर्ष सत्ता परिवर्तन के बाद देश छोड़ चुकी हैं और भारत में रह रही हैं। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति का इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि स्वयं शहाबुद्दीन ने अपने फैसले की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को बताया है और किसी राजनीतिक कारण का उल्लेख नहीं किया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बांग्लादेश की अंतरिम व्यवस्था में अगला राष्ट्रपति कौन होगा और आगे की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होगी।
स्वतंत्रता सेनानी से राष्ट्रपति बनने तक का रहा लंबा सफर
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उन्हें उस समय निर्विरोध चुना गया था क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। राजनीति में आने से पहले वह न्यायपालिका से जुड़े रहे और जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग में आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। शहाबुद्दीन बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके थे, जिसके कारण उन्हें एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मान मिला। छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव अवामी लीग और उसके छात्र संगठनों के साथ रहा। बाद में उन्होंने पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक पदों पर भी काम किया और सलाहकार परिषद के सदस्य भी रहे।
राजनीतिक बदलाव के दौर में निभाई अहम जिम्मेदारी
राष्ट्रपति के रूप में शहाबुद्दीन का कार्यकाल ऐसे समय में रहा, जब बांग्लादेश ने बड़े राजनीतिक बदलाव देखे। अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन और उसके बाद बने अस्थिर माहौल के दौरान उन्होंने संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई। अंतरिम सरकार के गठन तक राष्ट्रपति के रूप में उनकी जिम्मेदारी काफी अहम मानी गई। हालांकि बांग्लादेश में कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास होती हैं, फिर भी राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और राजनीतिक संक्रमण के समय उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अब उनके इस्तीफे के बाद देश में नए राष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
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