कनाडा में हाल के दिनों में हिंदू समुदाय के भीतर चिंता का माहौल बन गया है। इसका मुख्य कारण कुछ कथित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा हिंदू मंदिरों के बाहर आयोजित विरोध प्रदर्शन हैं। स्थानीय हिंदू संगठनों का कहना है कि ये प्रदर्शन अचानक नहीं हो रहे, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य समुदायों के बीच हिंसा और नफरत को भड़काना हो सकता है। इस परिस्थिति के मद्देनज़र करीब 30 हिंदू संगठनों ने मिलकर पुलिस को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें मंदिरों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।
पुलिस के रवैये पर उठाए सवाल
खुला पत्र लिखने वाले संगठनों का आरोप है कि पुलिस की प्रतिक्रिया इन घटनाओं पर पर्याप्त सख्त और प्रभावी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदर्शनों की निगरानी करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। संगठनों का कहना है कि मंदिर और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा की कमी से न केवल श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है, बल्कि सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है। उन्होंने पुलिस से स्पष्ट मांग की है कि ऐसे प्रदर्शन हो रहे स्थानों पर विशेष निगरानी और कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर
हिंदू संगठनों ने पत्र में साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देना नहीं है। उनका विश्वास है कि सभी समुदायों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में रहना चाहिए। संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि सभी धार्मिक स्थलों और उनके आसपास सुरक्षा व कानून व्यवस्था सख्त और प्रभावी हो। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि वह मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों के आसपास पर्याप्त निगरानी सुनिश्चित करें और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करें।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए संदेश
इस खुला खत का संदेश न केवल कनाडा के स्थानीय प्रशासन के लिए है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है। हिंदू संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा की उपेक्षा किसी भी समय बड़े विवाद और हिंसा का कारण बन सकती है। उन्होंने जोर दिया कि पुलिस और प्रशासन को धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। संगठनों ने यह भी कहा कि सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक अधिकारों और आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए ताकि शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके।
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