वैश्विक कूटनीति के मंच पर खुद को एक निष्पक्ष मध्यस्थ दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की नीयत और निष्पक्षता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। किसी भी विवाद में मध्यस्थ बनने की पहली शर्त यह होती है कि आप दोनों पक्षों के प्रति तटस्थ रहें, लेकिन पाकिस्तान अपनी पुरानी आदतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान की एक हालिया हरकत ने उसके सबसे बड़े मददगारों में से एक, अमेरिका को इस कदर नाराज कर दिया है कि वॉशिंगटन से सीधे शहबाज शरीफ सरकार की क्लास लगा दी गई है।
एक श्रद्धांजलि सभा और शहबाज शरीफ का वो बयान, जिसने अमेरिका को चुभाया
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक वीडियो है। शहबाज शरीफ हाल ही में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल होने तेहरान पहुंचे थे। वहां उन्होंने न सिर्फ खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनकी जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘महान नेता’ का दर्जा दे दिया। शरीफ ने भावुक होते हुए कहा कि दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान उन्हें हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि युद्ध में जान गंवाने वाले ईरानी उनके भाई-बहन हैं और पाकिस्तान हर मुश्किल परिस्थिति में ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। शहबाज शरीफ का ईरान के प्रति यह अंधा प्रेम अमेरिका को बिल्कुल रास नहीं आया और उसने इसे अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा माना।
अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट का फूटा गुस्सा: “हमे याद है तुम्हारा सच”
शहबाज शरीफ के इस बयान और वीडियो के सामने आते ही अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा, “इस्लामाबाद इस बात को अच्छे से दर्ज कर ले कि हम सब देख रहे हैं।” सीनेटर स्कॉट यहीं नहीं रुके, उन्होंने इतिहास के पन्ने पलटते हुए पाकिस्तान को उसका असली चेहरा दिखाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह भूलने की जरूरत नहीं है कि पाकिस्तान का असली सच क्या है। स्कॉट ने याद दिलाया कि हम एक ऐसे देश के बारे में बात कर रहे हैं, जिसने दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को सालों तक अपने यहाँ छिपा कर रखा और पनाह दी।
ईसाइयों पर अत्याचार और कतर से तुलना: पाकिस्तान की विश्वसनीयता शून्य
अमेरिकी सीनेटर ने पाकिस्तान के भीतर मानवाधिकारों के उल्लंघन और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ईसाइयों को प्रताड़ित करने के लिए ईश-निंदा जैसे एकतरफा कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है। स्कॉट ने कहा कि जो देश आज एक तानाशाह और नरसंहारी की तारीफ कर रहा है, उसकी कूटनीतिक योग्यता आतंकवादियों (हमास) को पनाह देने वाले कतर से बेहतर नहीं है। अमेरिका के इस कड़े रुख के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं कि जो देश खुद पूर्वाग्रहों और कट्टरपंथ से ग्रसित है, वह दो देशों के बीच मध्यस्थता करने के लायक कैसे हो सकता है।
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