Monday, February 2, 2026
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राम मंदिर में हुआ ऐसा कुछ, देखकर हर कोई रह गया हैरान, मुस्लिम दंपति ने किया वो जिसकी किसी को नहीं थी उम्मीद!

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अयोध्या की पवित्र भूमि पर आज एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया। अम्बेडकर नगर जिले से आए मुस्लिम दंपति शेर अली और शायरा बानो ने न केवल रामलला के दर्शन किए, बल्कि मंदिर परिसर में बैठकर पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने पूरे 20 मिनट तक मंदिर में रुककर उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस किया। सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने बेहद सादगी और श्रद्धा के साथ दर्शन किए और अपने अनुभव को ‘आध्यात्मिक शांति से भरपूर’ बताया।

शेर अली ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “राम मंदिर में बहुत शांति है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत तरीके से बनाया गया है। जो वादे सीएम योगी ने किए थे, उन्होंने उससे कहीं ज्यादा बेहतर विकास किया है।” उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की सुंदरता और वहां की सकारात्मक ऊर्जा उन्हें भीतर तक छू गई। शायरा बानो ने भी खुले दिल से मंदिर की सराहना की और कहा कि अबकी बार अयोध्या पूरी तरह बदल चुकी है – साफ-सुथरी, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिकता से भरपूर।

योगी सरकार की विकास योजनाओं को बताया ‘कायाकल्प’

शायरा बानो ने कहा कि उन्होंने पहले की अयोध्या भी देखी है और अब की भी। “पहले यहां की सड़कों की हालत खराब थी, चारों ओर अव्यवस्था थी। लेकिन अब अयोध्या एक आधुनिक तीर्थ स्थल बन चुकी है। इतना सुंदर निर्माण, इतनी बेहतर व्यवस्था… ये सब सीएम योगी के नेतृत्व में ही संभव हो सका है,” उन्होंने कहा।

दंपति ने यह भी अपील की कि धर्म के नाम पर बांटने की बजाय सभी को एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों की सुंदरता और इतिहास को समझना चाहिए। “हम आज यहां केवल पर्यटक बनकर नहीं आए थे, हम आस्था के साथ आए थे,” शेर अली ने कहा।

उन्होंने सभी देशवासियों से अपील की कि वे एक बार अयोध्या जरूर आएं और राम मंदिर की भव्यता को नजदीक से देखें। “यह किसी धर्म विशेष की बात नहीं है, यह भारत की संस्कृति की बात है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

धार्मिक सद्भाव का अद्भुत उदाहरण, सुरक्षा घेरे में कराया गया दर्शन

शेर अली और शायरा बानो को रामलला के दर्शन पुलिस सुरक्षा के बीच कराए गए। दोनों दोपहर 3:55 बजे मंदिर में प्रवेश किए और 4:15 बजे तक वहां मौजूद रहे। इस दौरान मंदिर प्रबंधन ने भी उनका स्वागत सम्मानपूर्वक किया। यह दृश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए नया था, बल्कि यह सामाजिक एकता और धार्मिक सौहार्द का भी प्रतीक बन गया।

इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में ही बसती है। जब एक मुस्लिम दंपति पूरे सम्मान के साथ एक हिंदू मंदिर में आस्था व्यक्त करता है, तो यह केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत होता है।

रामलला के दर्शन करने के बाद जब शेर अली ने कहा, “हमें बहुत अच्छा लगा, मंदिर में एक अलौकिक ऊर्जा है,” तो यह पूरे देश के लिए एक संदेश था — आस्था का कोई धर्म नहीं होता, उसका घर दिल होता है।

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