उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा का एक सवाल इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा कर रहा है। परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया था— ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के लिए सही एक शब्द चुनना था। इसके चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ शामिल थे। इस प्रश्न का सही उत्तर ‘अवसरवादी’ माना गया, लेकिन विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई। ब्राह्मण समाज के कुछ संगठनों का कहना है कि इस तरह के सवाल से समाज की भावनाएं आहत होती हैं और यह शब्द को गलत संदर्भ में दिखाने की कोशिश है। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस पर चर्चा तेज हो गई है।
ब्राह्मण समाज की नाराजगी और सरकार का एक्शन
विवाद बढ़ने के बाद कई संगठनों और नेताओं ने परीक्षा में शामिल इस सवाल को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि किसी भी समाज या जाति से जुड़े शब्दों को नकारात्मक अर्थ वाले प्रश्नों के विकल्प में रखना ठीक नहीं है। इस मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी संज्ञान लिया और अधिकारियों को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने में किसी प्रकार की गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी भी इस सवाल की समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
कांशीराम जयंती कार्यक्रम में बोले शिवपाल
इसी विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Shivpal Singh Yadav का भी बयान सामने आया है। इटावा में आयोजित Kanshi Ram जयंती कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। शिवपाल ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग का अपमान करना सही नहीं है और सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई बार ऐसे फैसले या घटनाएं सामने आती हैं, जिनसे समाज में विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह सभी वर्गों का सम्मान सुनिश्चित करे और इस मामले में पारदर्शी जांच कराए।
पुराने नारों का जिक्र, राजनीति में बढ़ी हलचल
अपने संबोधन के दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कांशीराम के कुछ पुराने नारों का भी जिक्र किया, जिन पर पहले भी राजनीतिक बहस हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने सामाजिक न्याय और समान अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया था। उनके विचारों ने देश की राजनीति को एक अलग दिशा दी। हालांकि उनके कुछ नारों को लेकर समय-समय पर विवाद भी होता रहा है। अब पुलिस भर्ती के सवाल और इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार इसे एक तकनीकी गलती बताते हुए जांच की बात कर रही है।
