Thursday, February 26, 2026
Homeउत्तर प्रदेशगिरफ्तारी या राहत? नार्को टेस्ट की मांग से मचा बवाल! शंकराचार्य की...

गिरफ्तारी या राहत? नार्को टेस्ट की मांग से मचा बवाल! शंकराचार्य की अग्रिम जमानत पर HC में कल सुनवाई

-

उत्तर प्रदेश में चर्चित हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर शुक्रवार 27 फरवरी को सुनवाई तय है। झूंसी थाने में दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए शंकराचार्य की ओर से कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया गया है। इस बीच उनके समर्थकों ने आरोप लगाने वालों के नार्को टेस्ट की मांग उठाकर मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई

मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है। कोर्ट नंबर 72 में फ्रेश कॉज लिस्ट में यह केस 142 नंबर पर लगा है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच इस पर सुनवाई करेगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत बताते हुए गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट यह देखेगा कि आरोपों की गंभीरता क्या है, जांच की स्थिति क्या है और आरोपी की ओर से सहयोग का क्या आश्वासन दिया गया है। यदि कोर्ट को लगे कि जांच में सहयोग संभव है और गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, तो राहत मिल सकती है। वहीं, यदि कोर्ट को लगे कि आरोप गंभीर हैं और जांच प्रभावित हो सकती है, तो अर्जी खारिज भी की जा सकती है।

नार्को टेस्ट की मांग से बढ़ा विवाद

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब शंकराचार्य के समर्थन में उतरे Dinesh Falahari Maharaj ने आरोप लगाने वाले छात्रों और आशुतोष पांडेय का नार्को टेस्ट कराने की मांग की। उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। फलाहारी महाराज का कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है। उनका दावा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दूसरे मोबाइल नंबर से फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी गई है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  नार्को टेस्ट हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं हो सकता और इसके लिए संबंधित पक्ष की सहमति भी जरूरी होती है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति पर उसकी इच्छा के विरुद्ध नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराया जा सकता।

आरोप-प्रत्यारोप और साजिश की चर्चा

फलाहारी महाराज ने आशुतोष ब्रह्मचारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पहले से विवादित रहा है और उसने शंकराचार्य को फंसाने की साजिश रची है। उन्होंने गौकशी कराने और हिस्ट्रीशीटर होने जैसे आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर, पुलिस की जांच जारी है। झूंसी थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अब धार्मिक, सामाजिक और कानूनी—तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है। एक तरफ शंकराचार्य के समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ आरोपों को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

कल की सुनवाई पर टिकी नजरें

शुक्रवार की सुनवाई इस मामले में अहम साबित हो सकती है। यदि अग्रिम जमानत मिलती है तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन अगर हाईकोर्ट अर्जी खारिज करता है, तो गिरफ्तारी की संभावना बढ़ सकती है।

कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनकर निर्णय देगा। यह भी संभव है कि कोर्ट जांच एजेंसी से स्टेटस रिपोर्ट मांगे या कुछ शर्तों के साथ अंतरिम राहत दे। फिलहाल, पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। धार्मिक संगठनों, सामाजिक समूहों और आम जनता की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि अदालत की कार्यवाही के बाद मामले की दिशा क्या होती है। क्या नार्को टेस्ट की मांग आगे बढ़ेगी? क्या जांच में कोई नया तथ्य सामने आएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल सकते हैं।

Read More-छुट्टियों पर सवाल या प्रशासनिक सख्ती? हिमाचल में IPS अधिकारी की जिम्मेदारियां जूनियर को सौंपे जाने से मचा हलचल

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts