कानपुर: कर्नलगंज क्षेत्र की रहने वाली रेशमा की शादी 19 मार्च 2021 को शहनवाज नामक युवक से हुई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन शादी के कुछ ही हफ्तों के भीतर रेशमा पर ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग को लेकर मानसिक दबाव बनना शुरू हो गया। रेशमा की बहन रिजवाना के मुताबिक, घरवालों को उम्मीद थी कि समय के साथ चीजें सुधरेंगी, लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए।
डेढ़ लाख देने के बाद भी नहीं थमी लालच की आग
परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और कुछ समय पहले डेढ़ लाख रुपये की सहायता भी की, ताकि ससुराल पक्ष की मांगें कुछ हद तक शांत हो जाएं। लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। शहनवाज और उसके परिजनों ने 5 लाख रुपये और मांगे। जब रेशमा के मायके से यह रकम नहीं मिली, तो तनाव और प्रताड़ना बढ़ गई। रेशमा ने अपने दुख किसी से नहीं कहे, लेकिन उसकी चुप्पी सब कुछ बयां कर रही थी।
चुप रहने वाली रेशमा ने आंखों से कह दी पूरी कहानी
रिजवाना बताती हैं कि रेशमा अकसर थकी-थकी और डरी हुई लगती थी। वह कहती हैं, “हमसे ज़्यादा कुछ नहीं कहती थी, लेकिन उसकी आंखें बहुत कुछ कह जाती थीं।” फिलहाल परिवार ने पुलिस से शिकायत की है और मामले की जांच जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या दहेज प्रथा का दंश अब भी महिलाओं को चुपचाप निगल रहा है?
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