उत्तर प्रदेश की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू आचरण नियमों में अहम बदलाव करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार ने वर्षों पुराने नियमों में संशोधन करते हुए पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति और निवेश से जुड़ी जानकारी पहले से ज्यादा स्पष्ट तरीके से देनी होगी। सरकार का कहना है कि बदलते समय और वित्तीय व्यवस्थाओं को देखते हुए इन नियमों को अपडेट करना जरूरी था, ताकि सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बनी रहें।
निवेश और संपत्ति की जानकारी देना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक रकम शेयर बाजार, स्टॉक, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश विकल्पों में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी विभाग को देनी होगी। इससे पहले इस तरह के निवेश को लेकर स्पष्ट नियम नहीं थे, जिससे कई बार जानकारी दर्ज नहीं हो पाती थी। सरकार का मानना है कि वित्तीय निवेश के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने से सरकारी कर्मचारियों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी बड़ी रकम का निवेश करता है तो उसकी सूचना रिकॉर्ड में होना जरूरी होगा। इस बदलाव को सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चल और अचल संपत्ति से जुड़े नियम भी बदले
कैबिनेट के फैसले के अनुसार अब सरकारी कर्मचारियों को अपनी चल संपत्ति यानी कार, महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने की स्थिति में भी विभाग को सूचना देनी होगी। हालांकि इसमें एक अहम बदलाव किया गया है। पहले नियम था कि यदि कोई कर्मचारी एक महीने के वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता है तो उसे इसकी जानकारी देनी पड़ती थी, लेकिन अब इस सीमा को बढ़ाकर दो महीने के वेतन के बराबर कर दिया गया है। यानी अब कर्मचारी दो महीने के वेतन से अधिक कीमत की वस्तु खरीदने पर ही सूचना देने के लिए बाध्य होंगे। इसके साथ ही अचल संपत्ति जैसे जमीन या मकान से जुड़ी जानकारी देने के नियमों को भी और स्पष्ट किया गया है, ताकि कर्मचारियों की संपत्ति का रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज हो सके।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
राज्य सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता को मजबूत करना और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करना है। प्रशासन का मानना है कि जब कर्मचारियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से दर्ज होगी तो जवाबदेही भी बढ़ेगी। इसके अलावा सरकार भविष्य में संपत्ति का विवरण नियमित रूप से जमा कराने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने पर भी विचार कर रही है। कैबिनेट बैठक के बाद जारी बयान में सरकार ने कहा कि यह फैसला सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के हित में है। इससे शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनी रहेगी।
