उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल इन दिनों एक बेहद चिंताजनक घटना को लेकर सुर्खियों में है। यह वही स्थल है, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर उद्घाटन किया था। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इस इलाके में 70 से ज्यादा भेड़ों की मौत ने प्रशासन और आम लोगों दोनों को चौंका दिया है। जिन चरवाहों की ये भेड़ें थीं, उनके लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। चरवाहों का कहना है कि एक झटके में उनकी वर्षों की मेहनत और आजीविका खत्म हो गई। मौके की तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं, जहां मरी हुई भेड़ों के शरीर अकड़े हुए हालत में पड़े मिले हैं। इस घटना ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल के आसपास की व्यवस्थाओं और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चरवाहों का आरोप: उद्घाटन का बचा हुआ बासी खाना बना मौत की वजह
भेड़ों की मौत को लेकर चरवाहों ने जो दावा किया है, उसने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। चरवाहों के मुताबिक, 25 दिसंबर को उद्घाटन कार्यक्रम के बाद बड़ी मात्रा में खाना बच गया था, जिसे वहीं खुले में फेंक दिया गया। उनका आरोप है कि यह खाना कुछ ही समय में बासी और सड़ा हुआ हो गया, जिसे आसपास चर रही भेड़ों ने खा लिया। इसके बाद अचानक भेड़ों की तबीयत बिगड़ने लगी और एक-एक कर उनकी मौत होने लगी। सोमवार, 29 दिसंबर तक 70 से 75 भेड़ों की मौत हो चुकी थी, जबकि करीब 200 भेड़ों की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है। एक चरवाहे ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि अब उनके पास जहर खाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है, क्योंकि उनकी पूरी रोजी-रोटी इन्हीं भेड़ों पर निर्भर थी। इस बयान ने घटना की गंभीरता को और गहरा कर दिया है।
मौके पर पुलिस और मेडिकल टीम
जैसे ही भेड़ों की मौत की खबर फैली, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। इसके बाद प्रशासन ने सरकारी पशु चिकित्सा टीम को भी राष्ट्र प्रेरणा स्थल बुलाया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 डॉक्टर और पशु चिकित्साकर्मी बीमार भेड़ों के इलाज में जुटे हुए हैं। टीम लगातार भेड़ों की जांच कर रही है और उन्हें जरूरी दवाएं दी जा रही हैं, ताकि बाकी जानवरों की जान बचाई जा सके। बताया गया है कि ये सभी भेड़ें चार चरवाहों—प्रदीप कुमार, विजय पाल, अजय पाल और शिवरतन—की थीं, जो फतेहपुर जिले से अपनी भेड़ों के साथ यहां आए थे। प्रशासन की ओर से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भेड़ों की मौत की असली वजह क्या है और क्या यह सिर्फ बासी खाने का मामला है या इसके पीछे कोई और कारण भी है।
जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
इस पूरी घटना ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े कार्यक्रम के बाद बचे हुए खाने का सही तरीके से निस्तारण क्यों नहीं किया गया। अगर चरवाहों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला बनता है। वहीं, भेड़ों की मौत से प्रभावित चरवाहे अब मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को उनकी आर्थिक मदद करनी चाहिए, क्योंकि यह नुकसान उनके लिए असहनीय है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल, राष्ट्र प्रेरणा स्थल के आसपास का माहौल गमगीन और तनावपूर्ण बना हुआ है। यह घटना सिर्फ जानवरों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या बड़े आयोजनों के बाद सुरक्षा और सफाई के नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं।
