उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए फरवरी का महीना मुश्किल भरा रहने वाला है। राज्य में बिजली का बिल अब सामान्य से 10 प्रतिशत ज्यादा आएगा। यानी जनवरी में जितनी बिजली उपभोग की गई, उसके लिए अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। बिजली कंपनियों ने यह फैसला फ्यूल सरचार्ज यानी ईंधन अधिभार बढ़ाने के कारण लिया है। इस कदम से राज्य के उपभोक्ताओं से कुल ₹616.05 करोड़ अतिरिक्त वसूला जाएगा। यह पिछले एक साल में किसी भी महीने की तुलना में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में बिजली का खर्च घटा था, लेकिन फरवरी में अचानक 10 प्रतिशत ज्यादा बिल आने से आम लोगों की जेब पर दबाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अधिभार से घरों और छोटे व्यवसायों पर भी असर पड़ेगा।
फ्यूल अधिभार और बिजली की असली कीमत
फ्यूल अधिभार का मतलब है बिजली कंपनियों का ईंधन पर खर्च, जिसे उपभोक्ताओं से लिया जाता है। पिछले साल जनवरी से अब तक बिजली कंपनियों को हर महीने यह तय करने का अधिकार मिला है। यानी अगर बिजली खरीदने की कीमत ज्यादा होती है तो उसका असर बिल पर सीधे पड़ता है।
फरवरी में बिल बढ़ने की वजह नवंबर 2025 में पावर कॉरपोरेशन द्वारा खरीदी गई बिजली की कीमत है। नवंबर में 8849 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई थी, जिसकी वास्तविक दर 5.79 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि नियामक आयोग द्वारा तय दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी। इसी अंतर के कारण उपभोक्ताओं से अतिरिक्त बिल वसूला जा रहा है।
विशेष बात यह है कि जनवरी में बिजली का खर्च घटा हुआ था, लेकिन अब फरवरी में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी रिकॉर्ड है। इससे पहले दिसंबर में सिर्फ 5.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि सामान्य महीने में इतनी महंगी बिजली खरीदना संदेहास्पद है। उन्होंने बताया कि जब मई में बिजली की मांग बहुत ज्यादा थी और तापमान बहुत ऊँचा था, तब पावर कॉरपोरेशन ने सिर्फ 4.76 रुपये प्रति यूनिट में बिजली खरीदी थी।
अवधेश वर्मा ने कहा कि इस बार महंगी बिजली खरीदना और 10 प्रतिशत फ्यूल अधिभार वसूलना उपभोक्ताओं के हित के खिलाफ है। परिषद ने बिजली नियामक आयोग से मांग की है कि इस अतिरिक्त वसूली को तुरंत रोका जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
उपभोक्ताओं की सावधानी और आगे की कार्रवाई
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अगर जांच में किसी अनियमितता पाए जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग ने अभी तक कोई फैसला नहीं दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बिजली कंपनियां लगातार फ्यूल अधिभार बढ़ाती रही, तो आम लोगों और छोटे व्यवसायों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। इसलिए पारदर्शिता और सही जांच बहुत जरूरी है। उपभोक्ताओं को अपने बिलों की भी जांच करनी चाहिए और किसी भी असामान्य बढ़ोतरी पर सवाल उठाना चाहिए।
इस तरह, फरवरी में यूपी के घरों और दुकानों पर बिजली बिल का बड़ा दबाव आने वाला है। उपभोक्ता परिषद और विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे अपनी खपत पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर आयोग को शिकायत भी करें।
