शाहजहाँपुर: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में ‘समय की पाबंदी’ अब केवल एक शब्द नहीं, बल्कि अनिवार्य नियम बन गया है। ताजा मामला शाहजहाँपुर का है, जहाँ ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान जिलाधिकारी (DM) धर्मेंद्र प्रताप सिंह का बेहद सख्त रूप देखने को मिला। जनता की समस्याओं को सुनने के लिए आयोजित इस शिविर में जब जिलाधिकारी ने कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए संबंधित थाना प्रभारी को आवाज दी, तो जवाब मिला कि ‘मैडम अभी आईं नहीं हैं’। यह सुनते ही साहब का पारा चढ़ गया। जनता की फरियादों के बीच अधिकारियों की यह लेट-लतीफी डीएम को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के आदेश दे दिए।
जब डीएम ने पूछा- ‘एसओ कहाँ हैं?’
तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश द्विवेदी जनता की शिकायतों का निस्तारण कर रहे थे। इस दौरान भूमि विवाद से जुड़ी शिकायतों की झड़ी लग गई। जब मिर्जापुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर मामले पर चर्चा शुरू हुई, तो डीएम ने संबंधित थाना प्रभारी (SO) सोनी शुक्ला को मौके पर बुलवाया। काफी देर तक इधर-उधर देखने के बाद जब पता चला कि एसओ साहब अभी तक तहसील पहुंची ही नहीं हैं, तो सभागार में सन्नाटा पसर गया। डीएम ने इसे सरकारी ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब सरकार जनता के द्वार पर समाधान लेकर आई है, तब जिम्मेदार अधिकारियों का नदारद रहना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों की मौजूदगी में देर से एंट्री
दिलचस्प बात यह रही कि जब एसपी राजेश द्विवेदी और एएसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे पहले से ही मौके पर मौजूद थे और शिकायतों को सुन रहे थे, उसके काफी देर बाद एसओ सोनी शुक्ला सभागार में पहुंचीं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की देरी ने मामले को और गंभीर बना दिया। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला एसओ को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाए। उनसे लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर ड्यूटी में इस तरह की लापरवाही क्यों बरती गई। डीएम के इस कड़े रुख ने जिले के अन्य लापरवाह अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है।
न्याय की चौखट पर हुए कई फैसले
बैठक के दौरान केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठे। तहसील के अधिवक्ताओं ने डीएम से शिकायत की कि सीओ (चकबंदी) समय पर कार्यालय नहीं बैठते हैं, जिससे किसानों और वादकारियों को दर-दर भटकना पड़ता है। इस पर डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि सीओ चकबंदी निर्धारित दिनों में अनिवार्य रूप से बैठें। समाधान दिवस के दौरान कुल 79 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16 का मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कर दिया गया। वहीं, कड़ाके की ठंड को देखते हुए डीएम और एसपी ने जरूरतमंदों को कंबल भी वितरित किए, जिससे फरियादियों के चेहरों पर राहत दिखाई दी।
प्रशासन का सख्त संदेश
शाहजहाँपुर की यह घटना जिले के तमाम विभागों के लिए एक नजीर है। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि जनसुनवाई मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है, और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई अक्षम्य है। भूमि विवाद के बढ़ते मामलों पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमें मौके पर जाकर विवादों को सुलझाएं ताकि गरीब जनता को बार-बार मुख्यालय न दौड़ना पड़े। इस कार्रवाई के बाद अब जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अधिकारी समयबद्धता का पूरा ख्याल रखेंगे।
