उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक स्कूल कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला धनौरा मार्ग स्थित मेस्को पब्लिक स्कूल का है, जहां सोमवार को आयोजित स्कूल कार्निवल के दौरान कुछ छात्रों ने फिल्म धुरंधर के एक वायरल गाने पर बुर्का पहनकर डांस किया। कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाईं और इसे सामान्य सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में देखा गया। हालांकि, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब इस डांस का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया, तो इसे लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और मामला स्कूल परिसर से बाहर निकलकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। बड़ी संख्या में यूजर्स ने इस डांस को अनुचित बताते हुए कहा कि बुर्का जैसे धार्मिक प्रतीक को मनोरंजन या मजाक के रूप में पेश करना गलत है। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। यूजर्स का कहना था कि स्कूल जैसे शिक्षण संस्थान से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस तरह की प्रस्तुति समाज में गलत संदेश देती है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यक्रम की अनुमति देते समय शिक्षकों और आयोजकों ने इस पहलू पर ध्यान क्यों नहीं दिया। सोशल मीडिया पर कार्रवाई की मांग तक उठने लगी, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
स्कूल प्रशासन ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
विवाद बढ़ने के बाद मेस्को पब्लिक स्कूल प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई। स्कूल प्रिंसिपल ने बयान जारी करते हुए इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि किसी भी धर्म या धार्मिक प्रतीक का अपमान करना स्कूल की मंशा नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था और इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। प्रिंसिपल ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की किसी भी गतिविधि से पहले विशेष सावधानी बरती जाएगी। स्कूल प्रशासन ने कहा कि छात्रों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अभिव्यक्ति का अवसर दिया जाता है, लेकिन अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी प्रस्तुति सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता के दायरे में ही हो।
पहले भी चर्चा में रहा स्कूल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेस्को पब्लिक स्कूल इससे पहले भी कई कारणों से चर्चा में रहा है, लेकिन इस बार मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ने के कारण ज्यादा संवेदनशील हो गया। कुछ सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से स्कूलों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न हों। वहीं अभिभावकों के एक वर्ग ने भी स्कूलों से अपेक्षा जताई है कि वे बच्चों को रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी पाठ पढ़ाएं। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और स्कूल प्रबंधन की माफी के बाद मामला शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करते समय संवेदनशील विषयों को लेकर कितनी सतर्कता जरूरी है।
