उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के बाद जैसे ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई, वैसे ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। इस ड्राफ्ट में प्रदेशभर से करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि संशोधित सूची में 12.55 करोड़ वोटरों को शामिल किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटने के बाद सीएम योगी ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंगलवार शाम को बीजेपी की एक अहम बैठक बुलाई। यह बैठक शाम करीब 7:30 बजे आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के शीर्ष प्रदेश स्तरीय नेता मौजूद रहे। बैठक का मकसद साफ था—अगर किसी भी तरह से वैध मतदाताओं के नाम सूची से छूटे हैं, तो उन्हें हर हाल में दोबारा जुड़वाया जाए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सांसद-विधायक, बूथ स्तर तक अभियान के निर्देश
इस अहम बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। इसके साथ ही प्रदेश के सभी सांसद और विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए कि अब यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठनात्मक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ स्तर तक सक्रिय होकर काम करें। जो भी मतदाता पात्र है और उसका नाम ड्राफ्ट सूची से हट गया है, उसे दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। सीएम ने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए।
SIR प्रक्रिया अभी अधूरी, 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज कराने का मौका
सरकार और चुनाव आयोग दोनों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल जो सूची जारी हुई है, वह केवल पहला ड्राफ्ट है। अगर किसी मतदाता का नाम इसमें नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। मतदाता 6 फरवरी तक अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। आयोग द्वारा प्राप्त आपत्तियों की जांच के बाद 27 फरवरी तक सभी मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद 6 मार्च को फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे लोगों को इस प्रक्रिया की सही जानकारी दें, ताकि किसी भी वैध वोटर का नाम अंतिम सूची से न छूटे।
दिल्ली दौरे में भी उठा SIR मुद्दा, चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा कदम
गौरतलब है कि एसआईआर ड्राफ्ट जारी होने से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली दौरे पर भी गए थे। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो इस दौरान उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची को लेकर सरकार और संगठन दोनों किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते। यही वजह है कि सीएम योगी ने सांसदों और विधायकों को सीधे मैदान में उतरने का आदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का भी अहम हिस्सा है, ताकि हर वैध मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
