उत्तर प्रदेश में वर्षों से कानूनी अड़चनों से जूझ रहे ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा (स्थापना के लिए स्थल मापदंड) (प्रथम संशोधन) नियमावली 2026” को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद प्रदेश में 2012 से पहले स्थापित करीब चार हजार से अधिक ईंट-भट्ठे अब वैध माने जाएंगे। लंबे समय से अवैध घोषित होकर संचालन कर रहे इन भट्ठों के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल उद्योग को स्थिरता मिलेगी, बल्कि वर्षों से चले आ रहे विवाद और कानूनी उलझनों पर भी विराम लगेगा।
2012 की नियमावली से बने थे हजारों भट्ठे अवैध
दरअसल, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 में पहली बार ईंट-भट्ठों को लेकर एक विस्तृत नियमावली लागू की गई थी। इस नियमावली के लागू होते ही प्रदेश के लगभग 6,500 ईंट-भट्ठे अवैध घोषित कर दिए गए थे। ये वे भट्ठे थे जो नियम बनने से पहले ही वर्षों से संचालित हो रहे थे, लेकिन नए मापदंडों पर खरे नहीं उतर पा रहे थे। इसके चलते हजारों संचालकों पर जुर्माना, बंदी और कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा था। संशोधित नियमावली 2026 के तहत अब ऐसे भट्ठों को कानूनी दायरे में लाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों में यह बदलाव व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि पुराने उद्योगों को बिना वजह नुकसान न झेलना पड़े।
रोजगार और राजस्व दोनों को होगा फायदा
योगी सरकार के इस फैसले का सीधा असर रोजगार और राज्य के राजस्व पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि करीब 30 से 40 हजार श्रमिकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा, जो इन ईंट-भट्ठों पर काम करते हैं। अब भट्ठे वैध होने से श्रमिकों को काम की स्थिरता मिलेगी और पलायन की समस्या भी कम होगी। वहीं सरकार को भी लाइसेंस शुल्क, कर और अन्य माध्यमों से राजस्व में बढ़ोतरी होगी। अब तक अवैध घोषित होने के कारण कई भट्ठे छिपकर या सीमित स्तर पर काम कर रहे थे, लेकिन वैधता मिलने के बाद उनका संचालन खुले तौर पर हो सकेगा। इससे निर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ईंट निर्माण इस सेक्टर की रीढ़ माना जाता है।
निर्माण उद्योग को संजीवनी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
ईंट-भट्ठा उद्योग का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। अधिकांश भट्ठे गांवों और कस्बों के आसपास स्थित हैं और स्थानीय लोगों को रोजगार देते हैं। योगी कैबिनेट के इस फैसले से न केवल ईंट-भट्ठा संचालकों को राहत मिलेगी, बल्कि निर्माण कार्यों में भी तेजी आने की संभावना है। सड़क, आवास, स्कूल और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को स्थायी आपूर्ति मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह फैसला “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। लंबे समय से अटकी समस्या के समाधान से यह संदेश भी जाएगा कि राज्य सरकार पुराने उद्योगों की वास्तविक कठिनाइयों को समझते हुए नीतिगत फैसले ले रही है।
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