उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शुक्रवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हो गए और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने यूजीसी के समर्थन और अलंकार अग्निहोत्री के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर लगातार भ्रम फैलाने और समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को आहत करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्ट्रेट परिसर में भीम आर्मी की मौजूदगी से कुछ देर के लिए प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हुआ। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की तोड़फोड़ की सूचना नहीं मिली। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं और जल्द कार्रवाई की अपील की।
यूजीसी की स्वायत्तता पर जोर
प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी नेताओं ने यूजीसी की स्वायत्तता और शैक्षणिक सुधारों का खुलकर समर्थन किया। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों को राजनीतिक या वैचारिक दबाव से मुक्त रखना बेहद जरूरी है। भीम आर्मी का मानना है कि यूजीसी जैसी संवैधानिक संस्थाएं देश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें कमजोर करने का कोई भी प्रयास देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। नेताओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता, अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना संविधान की मूल भावना है। अगर किसी भी स्तर पर इन मूल्यों से समझौता किया जाता है, तो संगठन सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाने को मजबूर होगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
अलंकार अग्निहोत्री पर भड़का गुस्सा
भीम आर्मी के प्रदर्शन का दूसरा प्रमुख कारण अलंकार अग्निहोत्री के कथित बयान और गतिविधियां रहीं। संगठन के नेताओं का आरोप है कि उनके वक्तव्यों से दलित और पिछड़े समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से दिए गए ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और शैक्षणिक माहौल को भी प्रभावित करते हैं। भीम आर्मी ने प्रशासन से मांग की कि अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस दौरान कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला, लेकिन संगठन के पदाधिकारियों ने सभी से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी बहस, पुलिस रही मुस्तैद
गौरतलब है कि देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था कि इन नियमों का दुरुपयोग होने की आशंका है और केंद्र सरकार को नया ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद शिक्षा और राजनीति से जुड़े संगठनों में बहस और तेज हो गई है। बरेली में हुए प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कानून-व्यवस्था बनी रही। मंडल अध्यक्ष सुशील गौतम, मंडल महासचिव आकाश सागर, जिलाध्यक्ष महेंद्रपाल सागर और महानगर अध्यक्ष शिवम भारती सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। भीम आर्मी नेताओं ने साफ कहा कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहेगा, लेकिन मांगें पूरी न होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
