Tuesday, February 24, 2026
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शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले की नाक काटने पर 21 लाख का इनाम? फलाहारी बाबा का विवादित बयान

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर आरोप लगाने के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ संतों का गुस्सा फूटा। फलाहारी बाबा ने 21 लाख रुपये इनाम की घोषणा की। पढ़ें पूरा विवाद और कानूनी कार्रवाई की ताजा जानकारी।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे गंभीर आरोपों के बाद संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी बाबा ने आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति उनकी नाक काटेगा और जूतों की माला पहनाएगा, उसे 21 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। फलाहारी बाबा ने सार्वजनिक मंच से कहा कि शंकराचार्य करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सनातन धर्म का अपमान हैं। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘गौ हत्यारा’ बताते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को हिंदू समाज का हिस्सा नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया है।

‘आपके हिंदू होने पर धिक्कार’ – बयान से बढ़ा विवाद

फलाहारी बाबा ने अपने बयान में बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य गौमाता की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे पूजनीय संत पर आरोप लगाना घोर निंदनीय है। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी पर गंभीर आपराधिक आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कई धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। बाबा का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को समाज में सम्मान नहीं मिलना चाहिए और सरकार को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक प्रशासन कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक सनातनी समाज शांत नहीं बैठेगा। हालांकि उनके बयान में हिंसक अपील की बात ने कानूनी और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि इस तरह की घोषणा कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।

शंकराचार्य पर दर्ज हुआ मुकदमा, कोर्ट के आदेश से FIR

दूसरी ओर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आरोपों में प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई है। जानकारी के मुताबिक, आशुतोष ब्रह्मचारी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत आवेदन दाखिल किया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि यह मामला बच्चों के साथ हुई अनुचित गतिविधियों से जुड़ा है और न्यायपालिका ने तथ्यों को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

धार्मिक आस्था बनाम कानूनी प्रक्रिया, आगे क्या?

इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक आस्था और कानूनी प्रक्रिया के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ संत समाज शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमा जांच की दिशा तय करेगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोप की सत्यता अदालत और जांच एजेंसियां तय करती हैं, न कि सार्वजनिक बयान। वहीं प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है, क्योंकि इस तरह के बयानों से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और दोनों पक्षों के बयानों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और अदालत की अगली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी। पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति और धार्मिक विमर्श को भी प्रभावित किया है, जिससे यह मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रह सकता है।

 

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