उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार सुबह उस समय सियासी सरगर्मी तेज हो गई, जब शहर के कई प्रमुख इलाकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े बड़े-बड़े पोस्टर नजर आए। इन पोस्टरों में पीएम मोदी को ‘राष्ट्र पुत्र’ की उपाधि देने की मांग लिखी हुई थी। सुबह टहलने निकले लोगों से लेकर राह चलते वाहन चालकों तक की नजर जैसे ही इन पोस्टरों पर पड़ी, मामला चर्चा का विषय बन गया। देखते ही देखते पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं और लखनऊ की सियासत में एक नई बहस छिड़ गई।
इन पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी तस्वीर के साथ उनके योगदान का उल्लेख किया गया है। राजधानी में अचानक इस तरह के पोस्टर लगने से प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल महसूस की गई। हालांकि, शुरुआत में किसी को यह स्पष्ट नहीं था कि आखिर इन पोस्टरों के पीछे कौन है और किस मकसद से यह मांग उठाई गई है।
पोस्टर में क्या लिखा है और किसने लगवाए?
थोड़ी ही देर में यह साफ हो गया कि इन पोस्टरों को आगरा के एक युवा नेता संजय चौधरी ने लगवाया है। पोस्टर में साफ शब्दों में लिखा गया है— “देश व दुनिया में सनातन का परचम लहराने वाले देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी को मिले राष्ट्र पुत्र की उपाधि।” पोस्टर के निचले हिस्से में संजय चौधरी की तस्वीर, नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित है, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरी पहल उन्हीं की ओर से की गई है। संजय चौधरी ने स्वयं मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की कि लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में ये पोस्टर उन्होंने ही लगवाए हैं। पोस्टरों का डिजाइन साधारण लेकिन संदेश बेहद प्रभावशाली रखा गया है। पीएम मोदी की बड़ी फोटो और भावनात्मक अपील वाले शब्द लोगों का ध्यान तुरंत खींच रहे हैं। यही वजह है कि कुछ ही घंटों में यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।
संजय चौधरी क्यों हैं अपनी मांग पर अटल?
मीडिया से बातचीत में संजय चौधरी ने अपनी मांग को लेकर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ देश के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति का नाम रोशन किया है। उनका मानना है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और इसी योगदान को सम्मान देने के लिए उन्हें ‘राष्ट्र पुत्र’ की उपाधि मिलनी चाहिए।
संजय चौधरी ने यह भी कहा कि वे इस मांग पर पूरी तरह अटल हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संजय चौधरी भारतीय जनता पार्टी में किसी आधिकारिक पद पर हैं या नहीं, और आगरा में उनके पास कोई औपचारिक जिम्मेदारी है या नहीं। इसको लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। उनकी इस पहल को कुछ लोग भावनात्मक समर्थन के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत प्रचार से जोड़कर भी देख रहे हैं। बावजूद इसके, संजय चौधरी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने विचार देश के सामने रखना है।
बीजेपी और विपक्ष की चुप्पी, लेकिन बहस तेज
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि अब तक न तो भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई की ओर से और न ही किसी बड़े पदाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है। वहीं विपक्षी दलों ने भी इस पूरे मामले पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की मांगें अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। राजधानी लखनऊ में यह मुद्दा अब आम लोगों की चर्चा से निकलकर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मांग को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं—कुछ इसे सम्मान की भावना बता रहे हैं तो कुछ इसे अनावश्यक करार दे रहे हैं। फिलहाल, यह साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्ट्र पुत्र’ की उपाधि देने की मांग ने लखनऊ से लेकर प्रदेश और देश की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में इस पर प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।
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