वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एक समय अपनी आक्रामक भाषा और अमेरिका को दी जाने वाली खुली चुनौतियों के लिए जाने जाते थे। अगस्त 2025 में दिए गए एक भाषण में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे ललकारते हुए कहा था—“अगर हिम्मत है तो आओ और मुझे ले जाओ, मैं मिराफ्लोरेस में इंतजार कर रहा हूं।” उस वक्त यह बयान समर्थकों के लिए जोश का विषय था और विरोधियों के लिए राजनीतिक नाटक। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही महीनों बाद यही चुनौती दुनिया की सबसे बड़ी खबर में बदल जाएगी। 3 जनवरी 2026 की तड़के जब कराकास की नींद टूटी, तब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का पूरा समीकरण हिल चुका था। जिस मादुरो को अजेय माना जाता था, वही अब अमेरिका की हिरासत में था।
ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजॉल्व की आधी रात
स्थानीय समयानुसार शनिवार तड़के अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने कराकास में एक गुप्त सैन्य अभियान को अंजाम दिया, जिसे “ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजॉल्व” नाम दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई पूरी तरह योजनाबद्ध और बेहद कम समय में पूरी की गई। अमेरिकी कमांडो सीधे फोर्ट टिउना मिलिट्री कंपाउंड पहुंचे, जहां मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अपने अत्यधिक सुरक्षित आवास में मौजूद थे। बताया गया कि छापेमारी के समय दोनों सो रहे थे और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। बिना किसी बड़े टकराव के ऑपरेशन को पूरा किया गया और कुछ ही घंटों में मादुरो को वेनेजुएला से बाहर ले जाया गया। यह वही क्षण था, जब मादुरो की पुरानी चुनौती इतिहास बन गई और अमेरिका की रणनीति सुर्खियों में आ गई।
व्हाइट हाउस का वीडियो और सियासी संदेश
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक 61 सेकंड का वीडियो साझा किया, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया। वीडियो में मादुरो के पुराने भाषणों के क्लिप्स दिखाए गए, जिनमें वह अमेरिका को चुनौती देते नजर आते हैं, और फिर अचानक गिरफ्तारी के दृश्य सामने आते हैं। इस वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस ब्रीफिंग और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान भी शामिल थे। हेगसेथ को यह कहते सुना गया कि “मादुरो के पास मौका था, लेकिन उन्होंने उसे गंवा दिया।” यह वीडियो केवल एक गिरफ्तारी का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी था—अमेरिका अब सिर्फ चेतावनी नहीं देता, बल्कि कार्रवाई करता है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और समर्थकों व आलोचकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
न्यूयॉर्क की जेल और आगे की राह
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-आतंकवाद, कोकीन की तस्करी और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दोनों को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां उनसे पूछताछ जारी है। इस गिरफ्तारी ने न केवल वेनेजुएला की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि लैटिन अमेरिका से लेकर यूरोप तक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। मादुरो समर्थक इसे संप्रभुता पर हमला बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे न्याय की जीत कह रहे हैं। जिस नेता ने कभी दुनिया की सबसे ताकतवर सत्ता को खुली चुनौती दी थी, वह अब उसी देश की अदालतों का सामना करने जा रहा है। सवाल सिर्फ इतना है—क्या यह कार्रवाई वैश्विक राजनीति की दिशा बदलेगी, या यह आने वाले बड़े टकराव की शुरुआत भर है?
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