उत्तर प्रदेश के मऊ सदर से विधायक रहे दिवंगत मुख्तार अंसारी के जन्मदिन के मौके पर उनके बेटे और मौजूदा विधायक अब्बास अंसारी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट किया। यह पोस्ट रविवार तड़के फेसबुक पर शेयर की गई, जिसमें उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि “शहीद कभी मरते नहीं।” इस एक लाइन ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया। समर्थकों ने कमेंट में मुख्तार अंसारी को याद किया और अब्बास अंसारी को हौसला दिया। लंबे समय से मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले अब्बास अंसारी का यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का बड़ा कारण बन गया।
पोस्ट में छलका बेटे का दर्द और यादें
अब्बास अंसारी की पोस्ट में बेटे का दर्द और पिता के लिए सम्मान साफ दिखाई देता है। उन्होंने लिखा कि वह भीड़ में खड़े होकर भी खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी दुआएं, प्यार और दी हुई सीख हर पल उनके साथ है। पोस्ट में उन्होंने अपने पिता को अपनी जिंदगी की रोशनी बताया, जिसने मुश्किल समय में रास्ता दिखाया। उन्होंने यह भी लिखा कि काश एक बार फिर पिता का सहारा और उनकी आवाज सुनने को मिल जाती। पोस्ट के आखिर में उन्होंने अल्लाह से पिता के लिए जन्नत में ऊंचा मुकाम देने की दुआ मांगी। यही भावनात्मक शब्द लोगों के दिल को छू गए।
अब्बास अंसारी की हालिया स्थिति और चुप्पी
इस पोस्ट को अब्बास अंसारी की मौजूदा स्थिति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी है, जिसके बाद उनकी विधायकी भी दोबारा बहाल हो गई। इससे पहले कानूनी मामलों के चलते उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। जमानत मिलने के बाद से अब्बास अंसारी सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से दूरी बनाए हुए थे। ऐसे में पिता के जन्मदिन पर किया गया यह पोस्ट उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह पोस्ट सिर्फ निजी भावना नहीं, बल्कि समर्थकों से जुड़े रहने का एक भावनात्मक तरीका भी हो सकता है।
मुख्तार अंसारी का राजनीतिक सफर और मऊ की राजनीति
मुख्तार अंसारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा में रहा। उन्होंने 1996 में बसपा से मऊ सदर सीट जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद 2002 और 2007 में वे निर्दलीय विधायक बने। बाद में उन्होंने कौमी एकता दल नाम से अपनी पार्टी बनाई और 2012 व 2017 में भी चुनाव जीता। कई आपराधिक मामलों के चलते वे लंबे समय तक जेल में रहे। 28 मार्च 2024 को जेल में ही हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद मऊ सदर सीट से उनके बेटे अब्बास अंसारी विधायक बने। आज भी मऊ की राजनीति में मुख्तार अंसारी की छवि और उनके समर्थकों का असर साफ देखा जाता है, और यही वजह है कि उनसे जुड़ी हर खबर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा देती है।
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