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मकर संक्रान्ति पर भाजपा नेता रमाकान्त पाण्डेय का भव्य सामाजिक आयोजन, जरूरतमंदों और दिव्यांगों को मिला सहारा

मकर संक्रान्ति के अवसर पर भाजपा नेता रमाकान्त पाण्डेय ने अपने पैतृक गांव ढोढ़री में खिचड़ी सहभोज, कंबल वितरण और सम्मान समारोह का आयोजन किया। सेवा, समर्पण और सामाजिक सौहार्द से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

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मकर संक्रान्ति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि दान, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रमाकान्त पाण्डेय ने मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर अपने पैतृक गांव गौर क्षेत्र के ढोढ़री गांव में एक भव्य सामाजिक आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने न केवल पर्व की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी दिया। सुबह से ही गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोगों की चहल-पहल और सेवा भाव से भरे स्वयंसेवकों की सक्रियता ने पूरे वातावरण को विशेष बना दिया। ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह का आयोजन वर्षों बाद देखने को मिला है, जहां पर्व के साथ-साथ जनसेवा को भी प्राथमिकता दी गई।

खिचड़ी सहभोज बना सामाजिक समरसता का प्रतीक

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक खिचड़ी सहभोज रहा, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। खिचड़ी सहभोज ने जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे का संदेश दिया। रमाकान्त पाण्डेय स्वयं सहभोज स्थल पर मौजूद रहे और लोगों से संवाद करते नजर आए। बुजुर्गों का कहना था कि इस तरह के आयोजन समाज में आपसी दूरी को कम करते हैं और एक-दूसरे के प्रति अपनापन बढ़ाते हैं। सहभोज के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो। आयोजन में साफ-सफाई और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह सहभोज एक आदर्श सामाजिक आयोजन के रूप में सामने आया। रमाकान्त पाण्डेय

कंबल वितरण से जरूरतमंदों को मिली राहत

कड़ाके की ठंड के बीच कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब गरीब, असहाय, जरूरतमंद और दिव्यांगजनों को कंबल वितरित किए गए। सर्दी से कांपते लोगों के चेहरों पर कंबल पाकर जो राहत और मुस्कान दिखी, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। रमाकान्त पाण्डेय ने स्वयं आगे बढ़कर जरूरतमंदों को कंबल भेंट किए और उनसे हालचाल जाना। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि इस ठंड में उन्हें सबसे बड़ी मदद मिली है। दिव्यांगजनों को विशेष सम्मान के साथ कंबल दिए गए, जिससे यह संदेश गया कि समाज के हर वर्ग की चिंता इस आयोजन का हिस्सा है। ग्रामीणों का कहना था कि इस तरह की सेवा ठंड के मौसम में किसी वरदान से कम नहीं है।

सम्मान समारोह में जनसेवा को मिली पहचान

कार्यक्रम के दौरान समाज सेवा, जनहित और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रमाकान्त पाण्डेय को “मकर संक्रान्ति सहयोग कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह” के तहत सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर उपस्थित लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। सम्मान ग्रहण करते हुए रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि यह सम्मान उनका नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों का है, जो हमेशा सेवा कार्यों में उनका साथ देते हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रान्ति हमें यह सिखाती है कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाना ही सच्ची पूजा है। उन्होंने क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए आगे भी इसी तरह काम करने का संकल्प दोहराया।

गणमान्य लोगों की मौजूदगी से बढ़ी आयोजन की गरिमा

इस कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से आदर्श शुक्ला, मनोज सिंह, अशोक कुमार गुप्ता, ग्राम प्रधान विजय चौधरी, बिंदु यादव, चंद्र प्रकाश तिवारी, नरेन्द्र कुमार मिश्र, संत कुमार, राज गौड़ चौधरी, बब्लू चौधरी, सर्वेश्वर पाण्डेय, शशिकान्त पाण्डेय, देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, वीरेन्द्र कुमार, उमेश कुमार पाण्डेय, मनोज कुमार तिवारी, विनोद, राजकुमार, राहुल पाल और अवधेश कुमार की उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रमाकान्त पाण्डेय

ग्रामीणों के लिए यादगार बना यह आयोजन

ढोढ़री गांव के लोगों के लिए यह मकर संक्रान्ति लंबे समय तक यादगार रहने वाली बन गई। ग्रामीणों का कहना था कि इस आयोजन ने न केवल उन्हें राहत दी, बल्कि यह एहसास भी कराया कि समाज में अभी भी सेवा और संवेदना जीवित है। रमाकान्त पाण्डेय बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ नजर आ रही थी। लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह के आयोजन होते रहेंगे और गांव विकास की राह पर और तेजी से आगे बढ़ेगा। मकर संक्रान्ति के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब पर्व और सेवा एक साथ आते हैं, तो उसका प्रभाव समाज पर गहराई से पड़ता है।

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