शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। उनके अधिवक्ता डॉ. पी.एन. मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शंकराचार्य और उनके शिष्य पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी खुद ही अपने बयान और सबूतों के कारण मुश्किल में पड़ते जा रहे हैं। प्रयागराज में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अदालत के सामने जो शपथ पत्र पेश किया गया है, उसमें कई ऐसी बातें हैं जो सच्चाई से मेल नहीं खातीं। उनके मुताबिक यह पूरा मामला झूठे आरोपों और भ्रम फैलाने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। वकील का कहना है कि इस मामले में अब शंकराचार्य की ओर से कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और जल्द ही मानहानि का मामला अदालत में दायर किया जा सकता है।
पासपोर्ट जब्त करने की मांग पर उठे सवाल
Ashutosh Brahmachari की ओर से अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया है, जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य का पासपोर्ट जब्त करने की मांग की गई थी। उनका तर्क था कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे विदेश जा सकते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह दावा ही अपने आप में गलत है, क्योंकि शंकराचार्य और उनके शिष्य के पास कोई पासपोर्ट है ही नहीं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा और धर्मशास्त्रों के अनुसार शंकराचार्य के लिए विदेश यात्रा करना प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसे में उनके विदेश भागने की आशंका जताना पूरी तरह निराधार है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार समुद्र पार करना शंकराचार्य के लिए वर्जित माना जाता है, इसलिए इस तरह का आरोप केवल भ्रम पैदा करने की कोशिश है।
ट्रेन में हमले के दावे पर जांच का हवाला
वकील डॉ. मिश्रा ने ट्रेन में कथित हमले की घटना पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जांच में अब तक इस हमले की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच में केवल नाक पर हल्की खरोंच जैसा निशान पाया गया, जिसे गंभीर चोट नहीं माना गया। उनके अनुसार डॉक्टरों की रिपोर्ट में भी यह नहीं कहा गया कि किसी धारदार हथियार से हमला हुआ था। इसके अलावा रेलवे पुलिस की जांच में भी कई अहम तथ्य सामने आए हैं। सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह पाया गया कि संबंधित डिब्बे में किसी संदिग्ध व्यक्ति के प्रवेश का कोई प्रमाण नहीं मिला। कोच अटेंडेंट के बयान में भी यह बात सामने आई कि जब आशुतोष ब्रह्मचारी बाथरूम में गए तो वह बिल्कुल ठीक थे और बाहर आने के बाद उन्होंने हमले की बात कही।
जांच और कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर
इस पूरे विवाद के बाद अब मामला अदालत और जांच एजेंसियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वकील का कहना है कि अगर झूठे आरोप लगाए गए हैं तो इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाना जरूरी है। उनका दावा है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। दूसरी ओर आशुतोष ब्रह्मचारी के आरोपों और घटनाक्रम की सच्चाई को लेकर भी जांच जारी है। फिलहाल यह मामला धार्मिक, कानूनी और सामाजिक तीनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन चुका है। आने वाले समय में अदालत की सुनवाई और जांच रिपोर्ट से ही यह साफ हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस पक्ष का दावा सही साबित होता है।
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