फिर दोहराया 11 साल पुराना इतिहास, टिकट की रेस में गुप्तेश्वर पांडेय पर भारी पड़े पूर्व IPS

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ips gupteshwar pandey JDU

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) को लेकर जेडीयू (JDU) ने अपने 115 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है. जो वाकई चौंकाने वाली है क्योंकि इस लिस्ट में सुशांत सिंह राजपूत केस में सुर्खियां बटोरने वाले और डीजीपी की नौकरी छोड़कर वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय (IPS Gupteshwar Pandey) का नाम शामिल नहीं है. जेडीयू ने उनकी जगह बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारी को चुनाव लड़ने का टिकट दिया है. बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार ने भी गुप्तेश्वर पांडे से कुछ दिन पहले ही जेडीयू का दामन थामा था. मगर टिकट की रेस में गुप्तेश्वर पांडे से आगे सुनील कुमार निकल गए. इस लिस्ट जारी होने के बाद एक बार फिर से बिहार की राजनीति में उथल-पुथल देखने को मिल रही है. क्योंकि अधिकतर लोगों का मानना था कि गुप्तेश्वर पांडे को टिकट जरूर मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

टिकट की रेस में गुप्तेश्वर पांडे को झटका
जदयू ने सुनील कुमार को गोपालगंज की भोरे सीट से टिकट दिया है. सुनील कुमार पटना के एसएसपी होने के साथ कई जोन के डीआईजी और आईजी भी रह चुके हैं. बताया जाता है कि, सुनील कुमार बिहार के सीएम नीतीश कुमार के करीबी अफसरों में से एक हैं और इन्होंने आईजी से लेकर एडीजी (पुलिस मुख्यालय) और डीजी (होमगार्ड), डीजी (अग्निशमन) समेत कई पदों पर तैनात रहे हैं.

वहीं बिहार की जिस सीट से सुनील कुमार को चुनाव लड़ने का टिकट मिला है उसी सीट से उनके बड़े भाई पहले अनिल कुमार विधायक रह चुके हैं. सुनील कुमार दलित बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं और 1987 बैच के आईपीएस अफसर थे. सुनील कुमार ने पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद से रिटायर होने के बाद 29 अगस्त को जदयू की सदस्या ली थी. जबकि 1987 बैच के ही आईपीएस अफसर और पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की राजनीति में आने की इच्छा एक बार फिर धरी की धरी रह गई.

दोहराया गया इतिहास
कह सकते हैं कि गुप्तेश्वर पांडेय के साथ राजनीति के मामले में फिर से 11 साल पहले वाला इतिहास दोहराया गया है. क्योंकि तब भी उन्होंने आईजी रहते हुए वीआरएस लिया था और बक्सर जो उनका पैतृक जिला भी है वहां से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी मगर तब भी वह टिकट की रेस में पीछे रह गए थे और इस बार भी उन्होंने डीजीपी रहते हुए वीआरएस लिया था. लेकिन राजनीति के मैदान में उतरने का रास्ता बंद हो गया. फिलहाल देखना होगा कि गुप्तेश्वर पांडेय का अगला कदम क्या होगा?

क्या बोले गुप्तेश्वर पांडे?
विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद गुप्तेश्वर पांडे ने एक फेसुबक पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने कहा- ‘अपने अनेक शुभचिंतकों के फ़ोन से परेशान हूँ। मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूँ। मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूँगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें। मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूँगा। कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन नहीं करे। बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है। अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहाँ के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें!’

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