बच्चों की परवरिश में सबसे बड़ी चुनौती होती है उनकी जिद को समझना और संभालना। जब बच्चा अपनी बात मनवाने के लिए चीखने-चिल्लाने लगता है या किसी चीज़ के लिए ज़िद पर अड़ जाता है, तो कई बार माता-पिता भी गुस्से में उसे डांट देते हैं। लेकिन पेरेंटिंग कोच Renu Girdhar का कहना है कि यह तरीका लंबे समय में बच्चे के व्यवहार को और जिद्दी बना सकता है। उनके अनुसार, बच्चे की जिद के पीछे कोई न कोई भावनात्मक कारण होता है— जिसे अगर समझ लिया जाए, तो बिना डांटे ही बच्चे को संभाला जा सकता है।
रेनू गिरधर का मानना है कि बच्चे डांट से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से सीखते हैं। अगर बच्चा किसी बात पर अड़ा हुआ है, तो सबसे पहले माता-पिता को उसे शांत मन से सुनना चाहिए। ऐसा करने से बच्चा खुद को समझा हुआ महसूस करता है और धीरे-धीरे अपने व्यवहार को सुधारने लगता है।
5 आसान तरीके, जिनसे बच्चे खुद कहेंगे ‘सॉरी’
पेरेंटिंग कोच ने ऐसे 5 आसान कदम बताए, जिनसे माता-पिता बिना चिल्लाए और सख्त हुए बच्चे को अनुशासित कर सकते हैं—
1. शांत रहें और तुरंत रिएक्ट न करें — गुस्से में प्रतिक्रिया देने से स्थिति बिगड़ती है।
2. बच्चे की बात पूरी सुनें — उसे लगे कि उसकी भावनाओं की कद्र हो रही है।
3. प्यार से समझाएं — डांटने के बजाय प्यार से सही-गलत बताएं।
4. चॉइस दें — बच्चे को छोटे-छोटे निर्णय लेने दें, ताकि उसे लगे वह कंट्रोल में है।
5. अच्छे व्यवहार पर प्रशंसा करें — बच्चे को पॉजिटिव रिइंफोर्समेंट दें, ताकि वह दोबारा वही अच्छा व्यवहार दोहराए।
रेनू का कहना है कि जब बच्चा देखता है कि मम्मी-पापा उसे समझ रहे हैं, तो वह अपनी गलती मानने में भी पीछे नहीं हटता। कई बार वह खुद आकर कहता है— “सॉरी मम्मा, गलती हो गई।”
डांट नहीं, भरोसे से बनता है रिश्ता
पेरेंटिंग में गुस्सा और सख्ती अस्थायी समाधान देते हैं, लेकिन भरोसा और प्यार बच्चे के साथ आजीवन रिश्ता मजबूत करते हैं। पेरेंटिंग कोच के मुताबिक, बच्चा जितना माता-पिता पर भरोसा करेगा, उतनी ही जल्दी वह अपनी गलतियां समझेगा और उन्हें सुधारने की कोशिश करेगा। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे के हर व्यवहार को जिद न समझें, बल्कि उसके पीछे की भावना को पहचानें।
रेनू गिरधर ने यह भी कहा कि छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए जिद के जरिए ध्यान खींचते हैं। ऐसे में यदि माता-पिता उन्हें समझने की कोशिश करेंगे, तो बच्चे धीरे-धीरे खुद अपनी गलती स्वीकार करना सीख जाएंगे। यही वह तरीका है जिससे घर का माहौल भी शांत रहता है और बच्चे में पॉजिटिव बदलाव भी आता है।
