मंगलवार को भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली अपनी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुंचे। दोनों ने यहां केली कुंज आश्रम में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। यह साल 2025 में उनकी तीसरी मुलाकात मानी जा रही है, जिसने एक बार फिर यह दिखा दिया कि व्यस्त जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बावजूद दोनों आध्यात्मिक शांति को कितना महत्व देते हैं। आश्रम पहुंचते ही वातावरण शांत और भावपूर्ण हो गया। विराट-अनुष्का ने बिना किसी दिखावे के सादगी के साथ संत के सामने घुटनों के बल बैठकर सिर झुकाया और आशीर्वाद लिया। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा का कारण बना।
सादगी, तिलक और तुलसी की माला में दिखा समर्पण
इस मुलाकात के दौरान विराट के माथे पर तिलक और गले में तुलसी की माला साफ दिखाई दी। वह पूरे समय हाथ जोड़कर महाराज जी की बातें ध्यान से सुनते रहे और बीच-बीच में मुस्कुराकर सहमति जताते रहे। अनुष्का भी पूरी तरह भावुक और विनम्र नजर आईं। उन्होंने संत के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा, “महाराज जी, हम आपके हैं और आप हमारे।” इस सरल लेकिन गहरे वाक्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने हंसते हुए उत्तर दिया, “हम सब श्रीजी के हैं। खूब आनंदपूर्वक रहो, मस्त रहो और भगवान के आश्रित रहो।” यह संवाद सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें जीवन जीने की एक सरल लेकिन मजबूत सोच छिपी हुई थी, जो आज के तनावभरे दौर में बहुत मायने रखती है।
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‘अपने काम को भगवान की सेवा समझो’—महाराज जी का जीवन मंत्र
प्रेमानंद महाराज ने इस अवसर पर जीवन को लेकर गहरी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने काम को भगवान की सेवा समझकर करना चाहिए। जीवन में गंभीरता, विनम्रता और निरंतर उन्नति जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक भगवान की अनुभूति न हो जाए, तब तक मनुष्य की यात्रा रुकनी नहीं चाहिए। हम सभी लौकिक और पारलौकिक दोनों क्षेत्रों से गुजरते हैं, लेकिन अंततः लक्ष्य एक ही है—अपने असली स्वामी तक पहुंचना। महाराज जी ने यह भी कहा कि इंसान को एक बार अपने ठाकुरजी को जी भरकर देखना चाहिए, क्योंकि वही असली अपने हैं। यह बातें सुनकर विराट और अनुष्का पूरी तरह ध्यानमग्न नजर आए और उन्होंने बिना किसी जल्दबाजी के संत के हर शब्द को आत्मसात करने की कोशिश की।
माया से परे असली संबंध की तलाश का संदेश
आगे अपने प्रवचन में प्रेमानंद महाराज ने जीवन की अस्थिरता और माया के भ्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनंत जन्म इसी भ्रम में गुजर गए कि कौन अपना है और कौन पराया, लेकिन अंत में सब छूट जाता है। असली अपना वही है जिसने हमें रचा, जिसने हमें जीवन दिया। इंसान को कम से कम एक बार उस असली पिता को देखने की तीव्र लालसा रखनी चाहिए। यही लालसा जीवन को दिशा देती है। इस संदेश का विराट और अनुष्का पर गहरा असर दिखा। उनकी शांत मुद्रा और श्रद्धा से भरी आंखें यह बताने के लिए काफी थीं कि यह मुलाकात उनके लिए सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा पाने का माध्यम थी। आश्रम से निकलते समय भी दोनों के चेहरे पर संतोष और शांति साफ झलक रही थी।
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