महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ कहे जाने वाले अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार की सुबह जब सूरज की किरणें बारामती की धरती को चूम रही थीं, तभी आसमान से गिरते आग के एक गोले ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का चार्टर्ड विमान बारामती एयरपोर्ट के रनवे के पास क्रैश हो गया। इस हादसे की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते अस्पताल के बाहर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर किसी की जुबां पर बस एक ही सवाल है—क्या यह विमान हादसा वाकई एक तकनीकी खराबी थी, या इसके पीछे कोई गहरा राज छिपा है?
मौत का वो खौफनाक मंजर: जब रनवे के पास आग का गोला बना लियरजेट-45
बुधवार सुबह करीब 8:10 बजे अजित पवार ने मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भरी थी। उन्हें जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में चार महत्वपूर्ण जनसभाओं को संबोधित करना था। विमान में उनके साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) पिंकी माली, सहायक विदिप जाधव और दो अनुभवी पायलट कैप्टन सुमित कपूर और सह-पायलट शांभवी पाठक सवार थे। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान ने बारामती एयरपोर्ट पर उतरने की पहली कोशिश की, लेकिन दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण वह सफल नहीं हो पाया। दूसरी कोशिश के दौरान करीब 8:45 बजे विमान का संतुलन बिगड़ा और वह रनवे के थ्रेशोल्ड के पास जा गिरा। चश्मदीदों का कहना है कि विमान के जमीन से टकराते ही एक जोरदार धमाका हुआ और पूरा विमान मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। स्थानीय ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन धमाके इतने जबरदस्त थे कि किसी को भी पास जाने का मौका नहीं मिला।
साजिश या तकनीकी खामी? उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में ‘साजिश’ की थ्योरी तेजी से तैरने लगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस विमान में राज्य का इतना बड़ा नेता सवार था, क्या उसकी सुरक्षा और मेंटेनेंस में कोई चूक हुई थी? डीजीसीए (DGCA) की शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की बात कही गई है, लेकिन एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इंजन में कोई गड़बड़ी जानबूझकर की गई थी या यह मौसम की मार थी। बारामती अजित पवार का गढ़ है, और वहां उनका इस तरह जाना किसी के गले नहीं उतर रहा। क्या विमान के रडार से गायब होने के उन आखिरी 3 मिनटों में कुछ ऐसा हुआ था जिसकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है? मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन सस्पेंस अभी भी बरकरार है।
महाराष्ट्र की राजनीति का एक युग समाप्त: ‘दादा’ की कमी कभी पूरी नहीं होगी
अजित पवार का जाना केवल एक परिवार या पार्टी की क्षति नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र ने एक ऐसा ‘मास लीडर’ खो दिया है जो अपने काम करने के सख्त अंदाज के लिए जाना जाता था। 1982 में राजनीति की शुरुआत करने वाले अजित पवार ने छह बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने प्रशासन पर अपनी पकड़ के जरिए राज्य को नई दिशा दी। उनके निधन की खबर मिलते ही शरद पवार और सुप्रिया सुले दिल्ली से पुणे के लिए रवाना हो गए हैं। पूरे महाराष्ट्र में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। बारामती की सड़कें आज सूनी हैं और वहां के हर घर में मातम छाया है। लोग अपने ‘दादा’ को याद कर रहे हैं जिन्होंने बारामती को विकास का मॉडल बनाया था।
जांच के घेरे में VSR एविएशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल
जिस लियरजेट-45 विमान (VT-SSK) में यह हादसा हुआ, उसे VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड संचालित कर रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह विमान करीब 16 साल पुराना था। अब सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर कंपनी का मेंटेनेंस रिकॉर्ड भी है। सवाल यह भी है कि क्या पायलटों पर खराब मौसम के बावजूद लैंडिंग का दबाव था? या फिर विमान के फ्यूल सिस्टम में कोई ऐसी खराबी आई जिसे अंतिम समय में संभाला नहीं जा सका? जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, सच सामने आएगा, लेकिन फिलहाल महाराष्ट्र की सियासत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना नामुमकिन है। अजित पवार की मौत के साथ कई राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं, लेकिन फिलहाल पूरा राज्य अपने चहेते नेता की अंतिम विदाई की तैयारी में डूबा हुआ है।
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