यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है और इस बार बजट का आकार प्रदेश के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े आंकड़े को छू सकता है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, आगामी बजट करीब नौ लाख करोड़ रुपये तक का हो सकता है, जो राज्य की आर्थिक दिशा और विकास की रफ्तार को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। यह बजट फरवरी महीने में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। फिलहाल वित्त विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी और बजट से जुड़े कर्मचारी इसी प्रक्रिया में जुट गए हैं। सरकार का फोकस इस बार केवल योजनाओं की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं को मजबूती देने और दीर्घकालिक विकास की नींव मजबूत करने पर रहेगा। बजट की शुरुआती कवायद के साथ ही प्रदेश के सभी विभागों से उनके खर्च और नई जरूरतों के प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं।
विभागों के साथ बैठकें शुरू, तय होगी प्राथमिकता
वित्त विभाग मंगलवार से विभिन्न विभागों के साथ सिलसिलेवार बैठकें शुरू करेगा, जिनमें अगले वित्तीय वर्ष के लिए मिलने वाले बजट प्रस्तावों पर गहन मंथन किया जाएगा। इन बैठकों का मकसद यह तय करना है कि किस विभाग को कितनी राशि दी जाए और किन योजनाओं को प्राथमिकता मिले। सूत्रों के मुताबिक, इस बार बजट में अनावश्यक खर्च पर लगाम लगाने और विकास से जुड़े क्षेत्रों में अधिक निवेश करने की रणनीति अपनाई जा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, कृषि, रोजगार और औद्योगिक विकास जैसे सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वित्त विभाग यह भी देखेगा कि पिछली योजनाओं में आवंटित धन का सही उपयोग हुआ या नहीं। जिन योजनाओं का असर जमीन पर साफ नजर आया है, उन्हें और मजबूती दी जा सकती है, जबकि कम प्रभावी योजनाओं की समीक्षा कर उनमें बदलाव संभव है।
वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी
आगामी बजट की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसे उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। सरकार पहले ही ‘समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ विजन डॉक्यूमेंट जारी कर चुकी है और बजट 2026-27 उसी रोडमैप को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। औद्योगिक निवेश बढ़ाने, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो और लॉजिस्टिक्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े आवंटन की संभावना है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स, MSME सेक्टर, पर्यटन और निर्यात को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को भी बजट में खास जगह मिल सकती है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश से न केवल राज्य की जीडीपी बढ़ेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि, सिंचाई और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं पर भी विशेष फोकस रखा जाएगा।
आम जनता के लिए क्या संकेत, किन वर्गों को मिल सकती है राहत
नौ लाख करोड़ रुपये के संभावित बजट से आम जनता को भी कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, बजट में महिला सशक्तिकरण, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएं, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और मजबूत किया जा सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, नए मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों के आधुनिकीकरण और मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त धन आवंटन की संभावना है। वहीं शिक्षा क्षेत्र में स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल एजुकेशन और छात्रवृत्ति योजनाओं पर जोर रह सकता है। सरकार का प्रयास रहेगा कि बजट केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंचे। अब सभी की नजरें फरवरी में पेश होने वाले इस बजट पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक दिशा किस ओर जाएगी।
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