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आधी रात दोस्त को वो लास्ट मैसेज… आखिर नाना पाटेकर आखिरी वक्त में गोवा के फ्लैट में अकेले क्यों थे?

Nana Patekar के निधन के बाद उनके आखिरी पलों से जुड़ी जानकारी सामने आई है। जानिए रात 2:30 बजे दोस्त को मैसेज करने और गोवा में अकेले रहने की पूरी कहानी।

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Nana Patekar: नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके आखिरी वक्त से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जिन्होंने उनके फैंस को भावुक कर दिया है। बताया जा रहा है कि गोवा स्थित अपने घर में रहते हुए नाना ने रात करीब 2:30 बजे एक करीबी दोस्त को मैसेज भेजकर तबीयत ठीक नहीं होने की बात कही थी। देर रात होने की वजह से दोस्त उस समय मैसेज नहीं देख सका। बाद में जब नाना से संपर्क नहीं हो पाया तो सुबह करीब 4 बजे उनके घर पहुंचकर उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। हालांकि, तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।

परिवार से दूर रहने की वजह क्या थी?

नाना पाटेकर (Nana Patekar) के आखिरी समय में अकेले होने की बात ने कई सवाल खड़े किए। हालांकि, उनके अकेले रहने का मतलब यह नहीं था कि उनका परिवार उनसे दूर था। नाना अपनी निजी जिंदगी को बेहद सादगी से जीते थे और किसी पर निर्भर रहना उन्हें पसंद नहीं था। गोवा या खड़कवासला में रहने के दौरान वह अपना काम खुद करना पसंद करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके पास केयरटेकर की सुविधा थी, लेकिन वह कई बार उसे भी छुट्टी दे देते थे। उनकी पत्नी नीलकंती पाटेकर से वह लंबे समय से अलग रह रहे थे, लेकिन दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ था। उनका बेटा मल्हार भी अपने काम के सिलसिले में पुणे और मुंबई में रहता था।

 

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जिंदगी ने नाना से कई बार छीना अपनों का साथ

नाना पाटेकर (Nana Patekar) की जिंदगी में अकेलापन अचानक नहीं आया था। उन्होंने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद परिवार के कई करीबी सदस्यों का भी निधन हो गया। सबसे बड़ा दुख उन्हें तब झेलना पड़ा, जब उनका छोटा बेटा बहुत कम उम्र में बीमारी के कारण दुनिया छोड़ गया। बाद में उनकी मां निर्मला पाटेकर भी इस दुनिया में नहीं रहीं। मां के साथ नाना का रिश्ता बेहद गहरा था। उनके जाने के बाद नाना ने कई मौकों पर जिंदगी, मौत और अकेलेपन को लेकर खुलकर बात की थी। इन घटनाओं ने उनके व्यक्तित्व को भी गहराई से प्रभावित किया।

अकेलेपन को ताकत बनाया, समाजसेवा में लगाया जीवन

नाना पाटेकर (Nana Patekar) ने निजी जिंदगी के दर्द को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने किसानों की मदद और सामाजिक कामों से खुद को जोड़ा और ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए जरूरतमंद किसानों के लिए काम किया। वह अक्सर सादगी और आत्मनिर्भरता की बात करते थे। उनके करीबी लोगों के मुताबिक, नाना को तड़क-भड़क वाली जिंदगी से ज्यादा शांत माहौल पसंद था। यही वजह रही कि जिंदगी के आखिरी दौर में भी वह भीड़ से दूर रहकर अपना समय बिताते थे। करोड़ों लोगों का मनोरंजन करने वाला यह कलाकार निजी जिंदगी में बेहद सादा रहा और उसके आखिरी पलों से जुड़ी ये बातें अब उनके चाहने वालों को भावुक कर रही हैं।

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