Sunday, February 1, 2026
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मां को अंधेरे में रखकर विरासत पर कब्जे की साजिश? संजय कपूर की मौत के बाद परिवार में फूटा बड़ा कानूनी विवाद

संजय कपूर की मां रानी कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर फर्जी फैमिली ट्रस्ट बनाकर संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप लगाया है।

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दिल्ली हाईकोर्ट में दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के परिवार से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला कानूनी मामला सामने आया है। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनकी पूरी पारिवारिक संपत्ति और विरासत हड़पने के लिए एक फर्जी फैमिली ट्रस्ट बनाया गया। रानी कपूर के अनुसार, यह साजिश उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखकर रची गई और इसका खुलासा उन्हें अपने बेटे संजय कपूर की मौत के बाद हुआ। संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को हुआ था। इस मामले में कुल 23 लोगों को पक्षकार बनाया गया है, जिनमें उनकी बहू प्रिया कपूर, पोता अज़ारियस कपूर, एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के दोनों बच्चे समायरा कपूर और कियान कपूर, बेटी मंधीरा कपूर स्मिथ और उनके बच्चे भी शामिल हैं। यह मामला सिर्फ संपत्ति का नहीं, बल्कि परिवार के भीतर भरोसे और रिश्तों के टूटने की कहानी भी बयान करता है।

‘मैं इकलौती कानूनी उत्तराधिकारी हूं’ – रानी कपूर की दलील

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अर्जी में रानी कपूर ने साफ कहा है कि वह अपने दिवंगत पति डॉ. सुरिंदर कपूर की इकलौती और वैध उत्तराधिकारी हैं। डॉ. सुरिंदर कपूर सोना ग्रुप ऑफ कंपनियों के संस्थापक और प्रमोटर थे, जिनका निधन जून 2015 में हुआ था। रानी कपूर के मुताबिक, उनके पति ने 6 फरवरी 2013 को अपनी वसीयत तैयार की थी, जिसमें अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति उन्हें सौंप दी थी। इस वसीयत को जनवरी 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट से कानूनी मान्यता यानी प्रोबेट भी मिल चुका है। खास बात यह है कि उस समय उनके तीनों बच्चों ने भी इस वसीयत पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी और सहमति दी थी। रानी कपूर का कहना है कि जब कानूनी रूप से संपत्ति उन्हें मिल चुकी थी, तो बाद में किसी भी तरह के ट्रस्ट या लेन-देन का कोई आधार नहीं बनता।

2017 के बाद बदला खेल, बिना जानकारी ट्रांसफर हुई संपत्ति

रानी कपूर ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि साल 2017 के आसपास उनकी संपत्ति को जटिल और अवैध वित्तीय लेन-देन के जरिए एक कथित फैमिली ट्रस्ट में डाल दिया गया। उनका दावा है कि यह सब उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया। रानी कपूर के मुताबिक, इस पूरे खेल का मकसद धीरे-धीरे उन्हें संपत्ति और कंपनी के नियंत्रण से बाहर करना था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर भ्रम में रखा गया और दस्तावेजों से दूर रखा गया। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट की संरचना इतनी उलझी हुई थी कि एक बुजुर्ग महिला के लिए उसकी सच्चाई समझ पाना लगभग नामुमकिन था। रानी कपूर का कहना है कि यह सब उनके अधिकारों को खत्म करने और पूरी पारिवारिक विरासत पर कब्जा जमाने की साजिश का हिस्सा था।

बेटे की मौत के बाद बढ़ा विवाद, कोर्ट से बड़ी मांग

रानी कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि बेटे संजय कपूर की मौत के तुरंत बाद बहू प्रिया कपूर ने बिना उन्हें बताए सोना ग्रुप की कंपनियों में अहम पद संभाल लिए। उनका दावा है कि यह सब बेहद तेजी और गोपनीय तरीके से किया गया। रानी कपूर ने कहा कि उनकी ईमेल आईडी को “हैक” होने का बहाना बनाकर उनसे कंपनी से जुड़ी अहम जानकारियां छिपाई गईं। इसके बाद उनकी जानकारी के बिना एक नया ईमेल अकाउंट बनाकर ट्रस्ट और कंपनियों से जुड़े फैसले लिए गए। अब रानी कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत उन्हें उसी स्थिति में लौटाई जाए, जैसी इस कथित ट्रस्ट के बनने से पहले थी। यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद नहीं रहा, बल्कि भारत के बड़े कॉरपोरेट घरानों में उत्तराधिकार और नियंत्रण को लेकर उठने वाले सवालों का प्रतीक बनता जा रहा है।

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